देश आजादी से पूर्व वर्ष 1944 को निरसा के सुख शांति एवं समृद्धि के लिए तत्कालीन जमीदारों ने निरसा बाजार एनएच 2 के किनारे भव्य मां काली की मंदिर की स्थापना की थी। साथ ही मां के जागृत स्वरूप को देख जमीदार एवं उनके वंशजों ने मां काली की 20 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण करवाया था। निरसा के सबसे पुराने मंदिर एवं पूजा में स्थानीय लोगों की कई सारी धारणाएं हैं। ऐसी मान्यता है कि मां काली का उपवास रख जो भी भक्त काली पूजा के दिन मां काली की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं, मां काली उनके सभी मनोकामना पूर्ण करती है।
निरसा काली मंदिर में आयोजित मां काली की पूजा के बाद मां की प्रतिमा अपने स्थापना काल से ही 5 दिनों तक मंदिर में स्थापित रहती है। इस दौरान आसपास के विवाहित महिलाएं मां की नित्य पूजा के साथ-साथ उनके चरणों में आलता एवं मांग में सिंदूर देने का काम करती है। 5 दिन बाद मां स्वतः अपने तैयारी स्थान से 1 फीट आगे बढ़ जाती है। जिसके बाद ही मां का विसर्जन होता है। हालांकि मां के इस जागृत रूप को देख कोई भी 5 दिन से पूर्व उन्हें विसर्जन नहीं करता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2UnpsSI
via IFTTT
Comments
Post a Comment