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Jharkhand daily news

अखंड सुहाग की कामना के साथ करवा चाैथ का व्रत रखा। दिनभर निर्जला उपवास पर रहीं। विधि-विधान के साथ भगवान गणपति, भाेलेनाथ और माता पार्वती की पूजा की। अंधेरा घिर अाया, ताे हाथ में करवा और दीपक के साथ आसमान निहारने लगीं। इंतजार था चांद के दीदार का। आखिर चलनी की ओट से चांद का दीदार हुआ। फिर अपने सुहाग का चेहरा भी देखा।

पांच बार परिक्रमा करते हुए पति के चरण छूकर आशीर्वाद लिया और पूजा-अर्चना कर दूध मिले जल से अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण किया। बड़े-बुजुर्गाें के भी आशीर्वाद के साथा पूरा हुआ सुहागिनाें के करवा चाैथ का व्रत। इससे पहले, सुहागिनों ने घरों में परिवार के बीच और कहीं-कहीं समूह में करवा चौथ की कथा सुनी, करवा बांटा। कई स्थानों पर पंडितों ने कथा सुनाई।

करवड़ा लै सर्व सुहागन, करवड़ा वटाइए नीं, भैन प्यारी वीरां, चन्न चढ़े ते पानी पीवां

पंजाबी समाज में सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य के लिए, ताे विवाह याेग्य युवतियों ने मनचाहा वर पाने की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। बुधवार को पाै फटने के पहले उन्हाेंने पवित्र हाेकर पूजा-अर्चना की और सासु मां से मिली सरगी खाकर निर्जला व्रत की शुरुआत की। शाम में सज-संवर कर जलते दीपक से सजी थालियों के साथ समूह में करवा बंटाया। बुजुर्ग महिलाओं और पंडिताइनों से सुनाई। लोकगीत भी गूंजते रहे - करवड़ा लै सर्व सुहागन, करवड़ा वटाइए नीं, कत्ती अटेंरी न, खंभ चरखा फेरीं न, वाल पैर पाईं न, सुई नूं पिरोंई न, रुठे नूं मनाईं न, सुत्ते नूं जगाईं न, भैन प्यारी वीरां, चन्न चढ़े ते पानी पीवां।



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Suhaagins fasted with long life of husband, women wished to get the desired groom, and sought unbroken good fortune by looking into the moon


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