तुलिन रेलवे स्टेशन पर अक्टूबर महीने से खड़ी पैसेंजर ट्रेन की बाेगियाें के अंदर उग्रवादियाें का मूवमेंट हाेता रहा, लेकिन किसी काे पता नहीं चला। यहां तक रेलवे के वरीय अधिकारियाें काे इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि, स्टेशन पर 24 घंटे जीआरपी और आरपीएफ की तैनाती रहती है। लगभग एक महीने से ज्यादा समय तक खड़ा रहने के बाद पैसेंजर ट्रेन को हटिया यार्ड लाया गया।
हटिया आरपीएफ साेमवार काे यार्ड में ट्रेन की जांच कर रही थी, ताे खाली स्लीपर बाेगी एस-4 में बर्थ के नीचे से एक देसी बंदूक व वर्दी मिली। सूचना पर अफसर माैके पर पहुंचे और हथियार व वर्दी काे जब्त कर जांच में जुट गए। बंदूक का पार्ट-पार्ट खुला हुआ था। इसके बाद मामले की जानकारी जीआरपी व आरपीएफ के वरीय अधिकारियाें काे दी गई है।
झारखंड-बंगाल पुलिस ने इलाके की जांच की
आरपीएफ यह पता कर रही है कि बोगी में हथियार व वर्दी कैसे पहुंचा। इस मामले में जीआरपी थाना ने सनहा दर्ज कर लिया है। उग्रवादियाें के मूवमेंट काे लेकर तुलिन के पास झारखंड पुलिस और बंगाल पुलिस की ओर से सघन अभियान चलाया गया। यह अभियान झारखंड और बंगाल के बॉर्डर एरिया तुलिन के आसपास चलाया गया है।
ट्रेन की बंद बाेगी के एस-4 से हथियार और उग्रवादी का वर्दी मिला है। गंभीर मामला है। बंद बाेगी में हथियार व वर्दी कैसे पहुंचा, जांच होगी।
सुभाष चंद वासन, थाना प्रभारी, जीआरपी, हटिया
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