कस्बों में सड़कों पर से जाम को मुक्त करने के लिए और सब्जी विक्रेताओं को मंडी में स्थापित करने के लिए प्रत्येक कस्बे में बीआरजीएफ योजना के अंतर्गत तीन लाख रुपए की लागत से सब्जी मंडी का निर्माण कराया था। लेकिन पंचायत की उदासीनता का शिकार होने के चलते सड़कों पर से सब्जी विक्रेताओं न तो हटाने का प्रयास किया और न ही दुकानें मंडी में पहुंची। जिस वजह से सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। वहीं यहां सरपंच और सचिवों का कहना है कि मंडी में दुकानदारों की बसाहट के लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बीआरजीएफ हाट बाजार योजना के अंतर्गत तीन लाख-तीन लाख रुपए की लागत से वीरपुर, ढोढर, कराहल, मानपुर में सब्जी मंडी का निर्माण कराया गया था। लेकिन यहां अब तक किसी दुकानदार ने अपनी दुकान नहीं सजाई है। जिस वजह से मंडी सूनी पड़ी-पड़ी ही जर्जर दिखाई देने लगी है।
खास बात यह है कि यहां दुकानदारों को थड़े नीलाम कर आवंटित हीं नहीं किए गए हैं। वहीं दुकानदार सड़कों पर अपनी दुकान जमाए बैठे हुए है। जिस वजह से सड़कों पर जाम के हालात दिखाई देते हैं।दुकानदारों का कहना है कि मंडी में दुकान लगाने पर यहां ग्राहक कम ही आते हैं। लोग बाजार में ही सामान खरीदना पसंद करते हैं। ऐसे में दुकानदारों को सब्जी खराब होने का डर बना रहता है। यदि सभी दुकानदार मंडी के अंदर ही दुकान लगाएं तो ही मंडी चल सकेगी।
पांच लाख सब्जी मंडी का निर्माण कराया, लेकिन सड़क पर ही लग रही सब्जी मंडी
मुख्य बाजार के पास ही पुरानी सब्जी मंडी है। ग्राम पंचायत ने दो साल पहले पुरानी सब्जी मंडी का जीर्णोद्घार किया जिस पर 5 लाख रुपए खर्च हुआ। इस पांच लाख से सब्जी मंडी के चबूतरों का आकार बड़ा किया गया, कच्चे चबूतरों का कोटा स्टोन और गर्मी-बारिश से बचाने के लिए टीनशेड करवाया गया।
जिले के कई गांव व कस्बों से बेहतर व व्यवस्थित इस सब्जी मंडी में कोई दुकानदार जाने को ही तैयार नहीं। पुरानी सब्जी मंडी से चंद कदम दूरी पर मुख्य बाजार की सड़क है। इस सड़क के दोनों किनारों पर सब्जी विक्रेता सुबह-शाम अपनी दुकानें सजा लेते हैं। यहां सरपंच रामदुलारी त्यागी का कहना है कि कुछ दुकानदारों ने सब्जी मंडी में दुकानें लगा ली हैं शेष दुकानदारों को भी मंडी में ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
छोटे रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई मंडी
मंडी के निर्माण का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। योजना के अनुसार सब्जी उगाने वाले छोटे किसान अपना सामान बेचने के लिए बिचौलियों का सहारा लेते थे। किसानों को उनकी उपज का सीधा फायदा मिल सके और वे अपनी उपज सीधे लोगों के बीच ला सकें इसके लिए मंडी हाट बाजार का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन पंचायत द्वारा न तो यहां दुकानों की नीलामी कराई गई और न ही यहां सब्जी विक्रेताओं और सामान बेचने वालों को स्थापित करने के प्रयास किए गए जिससे लोग अभी तक यहां सामान बेचने के लिए नहीं पहुंचे हैं।
कराहल में तीन साल बाद भी शिफ्ट नहीं हुई मंडी
कराहल में वर्तमान में करियादेह तिराहे पर मंडी का संचालन किया जाता है। यहां मंडी का निर्माण कार्य साल 2015 में तीन लाख रुपए की लागत से कराया गया था। जिसका उद्घाटन भी तब के प्रभारी मंत्री लालसिंह आर्य और सांसद अनूप मिश्रा ने किया था। मंडी में लोगों को टीनशेड के नीचे थड़े बनाकर दिए थे लेकिन यहां मंडी में थड़ों का आवंटन नहीं हो सका है। जिस वजह से मंडी व्यापारी सोनीराम जाटव का कहना कि मंडी लगाएं तो कहां लगाएं। पहले यहां मंडी लगाई थी लेकिन खरीददार ही नहीं पहुंचते हैं। यहां पंचायत सचिव पूरण चंद मीणा का कहना है कि वह इस संबंध में दुकानदारों को हिदायत देंगे।
ढोढर में बगदिया तिराहे पर मंडी हो रही संचालित
ढोढर में ग्राम पंचायत द्वारा वर्ष 2016 में जून के महीने में मंडी में टीनशेड और थड़े बनवाने के साथ-साथ पानी की टंकी का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन यहां वर्तमान में दुकानदार और बाहर से आने वाले ग्रामीण अपनी मोटर साइकिलें खड़ी करते हैं। क्योंकि यहां मंडी बगदिया तिराहे पर संचालित की जा रही है।
पंचायत ने कई बार यहां मंडी की बसाहट के लिए दुकानदारों को कहा लेकिन दुकानदार बगदिया तिराहे पर अपनी गुमटियां जमाए हुए बैठे हुए हैं। जिस वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां पंचायत सचिव रामसिंह मीणा कहना है कि वह सब्जी दुकानदारों को नोटिस जारी कर उन्हें सब्जी मंडी में शिफ्ट कराएंगे।
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