प्रखंड के होंहे कला गांव के हजारों लोग जर्जर व कीचड़ के बीच लगे चापाकल का पानी पीने को मजबूर हैं। यहां बताते चलें कि होंहे कला सामुदायिक भवन के पास का चापाकल झाड़ियों व कीचड़ के बीच है जहां आसपास के हजारों लोग इसी चापाकल का पानी पीते हैं। यह चापाकल बहुत पुराना है तथा उसका फर्श भी टूट कर खत्म हो गया है ।
गांव के ग्रामीण आशा देवी ने बताया कि चापाकल का फर्श टूट जाने के कारण चापाकल से निकलने वाला सारा पानी वही जमा होता है । इसकी वजह से वहां झाड़ी हो गई है। साथ ही चापाकल के आसपास कीचड़ भी हो गया। उन्होंने बताया कि गांव के बीच में होने के कारण लोग इसी चापाकल का पानी पीते हैं। उन्होंने बताया कि चापाकल का फर्श बनाने के लिए मुखिया को कहा गया है लेकिन अभी तक उसे नहीं बनाया गया है।
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