अब मेयर और अफसरों के बीच अधिकार को लेकर ठन गई। इसकी झलक गुरुवार को उस समय दिखी जब मेयर आशा लकड़ा की बुलाई बैठक में नगर आयुक्त मुकेश कुमार नहीं आए। श्री पब्लिकेशन कंपनी के साथ एग्रीमेंट के मुद्दे पर यह बैठक बुलाई गई थी। सुबह 11.20 बजे मेयर अपने वकील के साथ निगम कार्यालय पहुंचीं और 11.45 से 12.45 बजे तक निगम हॉल में बैठकर नगर आयुक्त (एमी) और उप नगर आयुक्त का इंतजार करती रहीं, पर वे नहीं पहुंचे।
सिर्फ कार्यालय अधीक्षक आए, 1 घंटे तक इंतजार करने के बाद मेयर ने बैठक स्थगित कर दी। मेयर ने कहा कि कई बार एमसी को फाेन किया गया, लेकिन उनका मोबाइल बंद आ रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी चयन को लेकर उठे विवाद को समाप्त करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। क्योंकि, झारखंड नगरपालिका अधिनियम के प्रावधान से ऊपर कोई नहीं है। मैं संस्थान की मुखिया हूं; यहां कोई त्रुटि है तो उसे सुधारना मेरा कर्तव्य है, इसलिए बैठक बुलाई थी।
इससे कोई भाग नहीं सकता। शुक्रवार को सुबह 11 बजे फिर बैठक हाेगी। इससे पहले एमसी ने मेयर को पत्र भेजकर कह दिया था कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए कोई बैठक करना या वकील के जरिए टिप्पणी करना उचित नहीं हाेगा।
मेयर-नगर आयुक्त के बीच पत्र वार
मेयर और नगर आयुक्त के बीच मात्र एक छत का फासला है। इसके बावजूद विवाद का स्तर यहां तक पहुंच गया कि दाेनाें के बीच पत्र वार शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह में मेयर ने पांच पत्र नगर आयुक्त को भेजा
जवाब में नगर आयुक्त ने बुधवार देर रात मेयर के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें पत्र भेजा। उनके सवालों का जवाब देते हुए मेयर ने गुरुवार को फिर एक पत्र नगर आयुक्त को भेज दिया।

आम लोगों के लिए राहत: 19 से श्री पब्लिकेशन देगा होल्डिंग नंबर, ट्रेड लाइसेंस
होल्डिंग टैक्स कलेक्शन के लिए चयनित श्री पब्लिकेशन को लेकर मेयर-नगर आयुक्त में चल रहे विवाद के बीच लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। नगर आयुक्त ने श्री पब्लिकेशन को 19 अक्टूबर से होल्डिंग टैक्स वसूलने, नया होल्डिंग नंबर जारी करने, ट्रेड लाइसेंस बनाने और रिन्यूवल करने सहित वाटर यूजर चार्ज वसूलने का निर्देश दे दिया है। कंपनी को अपना सेटअप निगम में स्थापित करने और निगम के डेटा के अनुसार काम करने को कहा गया है, ताकि लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
उन्होंने बताया कि होल्डिंग नंबर और ट्रेड लाइसेंस नहीं मिलने से लाेग परेशान थे, इसलिए एग्रीमेंट की शर्तों के तहत कंपनी को काम करने का निर्देश दिया गया है। मालूम हाे कि पिछले 2 माह से होल्डिंग नंबर नहीं मिलने से जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री में 50 फीसदी तक की गिरावट आ गई थी। ट्रेड लाइसेंस के लिए लाेग परेशान थे।
एक्सपर्ट व्यू: विवाद से छवि खराब, शहर का विकास में भी हो रहा है प्रभावित, दोनों पक्ष मिलकर काम करें
मेयर और अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद से निगम की छवि खराब हो रही है। काेराेना काल में आम जनता हाेल्डिंग, ट्रेड लाइसेंस के लिए परेशान है। लेकिन समस्या दूर करने के बजाय दिनाें दिन विवाद बढ़ते जा रहा है। इसका दूरगामी असर दिखेगा। विवाद जारी रहने पर विकास के कार्य ठप हो जाएंगे। क्योंकि, जब निगम के पास टैक्स के पैसे नहीं आएंगे तो सड़क-नाली बनाना तो दूर साफ-सफाई का खर्च भी नहीं निकलेगा। क्योंकि आर्थिक रूप से निगम आज भी मजबूत नहीं है। जनहित में विवाद दूर कर दाेनाें पक्ष को काम करना चाहिए।
-सुदर्शन सिंह, पूर्व सीईओ
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