शहर में कहां सफाई हो रही और कहां नहीं? किस गली और सड़क में फैला है कचरा? अब इसकी मॉनीटरिंग स्वतंत्र एजेंसी करेगी। निगम ने सफाई की मॉनीटरिंग के लिए स्वतंत्र एजेंसी से अनुबंध कर लिया है।
एजेंटी की टीमें शहर में घूम-घूमकर सफाई व्यवस्था का जायजा लेकर निगम को रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर जहां सफाई सिस्टम ठप होगा, वहां टीम भेजकर सफाई करवायी जाएगी।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत शहर में सफाई का ठेका लेने रामकी कंपनी की माॅनीटिरिंग अब तक निगम के अफसर ही कर रहे थे। लगातार निगरानी के दावों के बावजूद शहर के सफाई सिस्टम में बेहतर बदलाव नजर नहीं आ रहा था। रोज कई जगह कचरे का ढेर और नालियों में गंदगी की शिकायतें आती हैं।
इस वजह से स्वतंत्र एजेंसी से मॉनीटरिंग की जरूरत महसूस की गई। स्वतंत्र एजेंसी को पांच साल में करीब दो करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। हालांकि ये पैसे निगम अपने पास नहीं रामकी को होने वाले भुगतान से काटकर देगा।
शहर के करीब सवा दो लाख घरों से निकलने वाले लगभग साढ़े पांच सौ टन कचरे को इकट्ठा करने और उसे नष्ट करने दिल्ली की कंपनी को ठेका दिया गया है। इसके एवज में कंपनी को सालाना करीब 35 करोड़ रुपए पर ठेका दिया है।
यह कंपनी ठीक से काम कर रही है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए ही एजेंसी की नियुक्ति की गई है। एजेंसी को हर महीने तीन लाख से ज्यादा का भुगतान किया जाएगा। पांच साल में निगम उसे 1.97 करोड़ रुपए का पेमेंट होगा।
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