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शारदीय नवरात्र में कन्या पूजा का विशेष महत्व

शारदीय नवरात्र में कन्या भोज के लिए शनिवार शुभ माना गया है। इस दिन कन्या भोज या कन्या पूजन करने से विशेष लाभ प्राप्त होगा। दरअसल इस बार एक दिन में दो तिथियों का संयोग बन रहा है। जिसके कारण लोगों में तिथी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
24 अक्टूबर को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी,। धर्म सिंधु ग्रंथ के अनुसार अगले दिन शाम के समय विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने पर 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए। पं.आनंद शर्मा बताते है कि शारदीय नवरात्र में कन्या पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए कन्या पूजा 24 अक्टूबर को की जाएगी।
उन्होंने बताया कि अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23 अक्टूबर को सुबह 6:57 में हो गया है,जो 24 अक्टूबर को 6:58 बजे तक रहेगा। उसके बाद महानवमी प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे मे कन्या पूजा 24 अक्टूबर को करना शुभ फलदायी होगा। उन्होंने बताया कि जो लोग पहला एवं आखिरी नवरात्र व्रत रखते है उन्हें अष्टमी व्रत 24 अक्टूबर को रखना चाहिए। 24 अक्टूबर को रखा व्रत अति शुभ है। इस दिन महागौरी की पूजा का भी विधान बन रहा है।।

संयुक्त नवमी व दशमी में अपराजिता देवी की पूजा
पं.आनंद शर्मा ने बताया कि जब नवमी और दशमी संयुक्त हो तो अपराजिता देवी की पूजा दशमी को उत्तर-पूर्व दिशा में दोपहर के करनी चाहिए। इस दिन कल्याण एवं विजय के लिए अपराजिता पूजा का विधान है। अपरान्ह प्रदोष केवल गोण काल है। यदि दशमी दो दिन तक चली गई हो तो प्रथम (नवमी से युक्त) अविक्रित होनी चाहिए। यदि दशमी प्रदोषकाल में दो दिन तक विस्तृत हो तो एकादशी से संयुक्त दशमी स्वीकृत होती है। यदि दोनों दिन अपरान्ह में दशमी ना अव्यवस्थित हो तो नवमी से संयुक्त दशमी मान ली जाती है। किंतु ऐसी दशा मे जब दूसरे दिन श्रवण नक्षत्र हो तो एकादशी से संयुक्त दशमी मान्य होती है।



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The special importance of female worship in Shardiya Navratri


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