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बेसिक लाइफ सपोर्ट वाले एंबुलेंस से ही गंभीर मरीज भेजे जा रहे हैं रांची व रायगढ़ के अस्पताल

जिले में एक भी एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस नहीं है। एएलएस एंबुलेंस के नहीं होने से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर करने में परेशानी हो रही है। इस एंबुलेंस में जिंदगी बचाने वाले सभी उपकरण लगे होते हैं। उसमें प्रशिक्षित मेडिकल स्टॉफ भी मौजूद रहता है, जो मरीजों की जान बचाने के लिए सहायक होते हैं।
जिले में हर दिन कई मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए यहां से अन्य जगहों पर रेफर किया जा रहा है। जिले के मरीजों को बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस के माध्यम से ही रेफर किया जाता है। बीएलएस एंबुलेंस में उतनी सुविधा नहीं है, जितनी गंभीर मरीजों को रेफर करने में होती है। बीएलएस एंबुलेंस में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जीवनरक्षक दवाइयां उपलब्ध होती है, जो गंभीर मरीजों के रेफर करने के लिए आवश्यकता से कम हैं। बीएलएस एंबुलेंस मरीजों को घर से अस्पताल तक पहुंचाने के लिए उचित है क्योंकि इसमें आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए दवाओं का स्टाक रखा हुआ होता है पर मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले के अस्पतालों से दूसरे अस्पतालों में रेफर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसे देखते हुए अब जिले में भी एएलएस एंबुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार एएलएस एंबुलेंस पड़ोसी जिले अंबिकापुर और रायगढ़ में उपलब्ध है। लेकिन जशपुर जिले में एक भी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं है। जिसके कारण कई मरीज एंबुलेंस से जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

स्वीकृति के एक साल बाद भी नहीं हुई खरीदी
विधानसभा चुनाव 2018 में मिली कांग्रेस की सफलता के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 5 फरवरी 2019 को कुनकुरी पहुंचे थे। यहां उन्होंने एक सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान जिले में दो ट्रामा वैन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए संसदीय सचिव मिंज ने जून 2019 में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से मुलाकात कर, बजट आबंटित करने का अनुरोध किया था। इस पर उन्होंने खनिज न्यास निधि से ट्रामा वैन खरीदी की अनुशंसा कलेक्टर से की थी। स्वास्थ्य मंत्री के इस अनुशंसा पर जिले के प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत ने ट्रामा वैन के लिए डीएमएफ मद से खरीदी के लिए 45 लाख रुपए स्वीकृति दिया था। स्वीकृति के बाद कलेक्टर ने वैन की खरीदी के लिए जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को क्रय एजेंसी बनाया था। मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने खरीदी की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी डीपीएम को दिया था। लेकिन स्वीकृति मिलने के एक वर्ष के बाद भी ट्रामा वैन की खरीदी नहीं हो सकी है।

बीएसएल एंबुलेंस में होती है परेशानी
जिले में अभी बीएसएल एंबुलेंस का ही उपयोग किया जा रहा है और इस एंबुलेंस के माध्यम से ही मरीजों को रेफर करने के बाद दूसरे अस्पतालों में लेकर जाते हैं। इस एंबुलेंस में ज्यादा सुविधा नहीं होने के कारण एंबुलेंस चालक ही रेफर मरीज को उनके परिजनों के साथ लेकर दूसरे अस्पतालों की ओर जाते है। दूसरे अस्पतालों में जाने के दौरान रास्ते में मरीज की यदि स्थिति ज्यादा खाराब हो जाती है तो उसे रास्ते में उचित उपचार नहीं मिल पाता है जिसके कारण कई मरीजों का रास्ते में ही मौत हो जाता है।

इन गंभीर मामलों में मिलेगा लाभ
जिले को एक एएलएस एंबुलेंस की सुविधा मिल जाने से हार्ट अटैक, सांस लेने में परेशानी, नवजात से जुड़े गंभीर मामले, बर्न केस, सड़क दुर्घटना में हेड़ इंजरी, प्रसव सहित किसी भी आपातकालीन स्थिति में आधुनिक चिकित्सा उपचार की सुविधा मिल सकेगी। इस एंबुलेंस में वेंटिलेटर, ऑटोमेटेड एक्सटरनल डिफेबरीलेटर, मल्टी पैरा मॉनीटर, फिटल डॉप्लर,गंभीर बीमारियों से संबंधित आपातकालीन दवाओं के अलावा दो फैन और फ्रीज और मेडिकल स्टाप उपलब्ध होते हैं।

सड़क हादसे में घायलों को मिलेगा लाभ
जिले में प्रतिदिन 5 से 7 सड़क दुर्घटना के मामले सामने आते हैं। दुर्घटना में घायल अधिकतर मरीजों को जिले के अस्पतालों में प्राथमिक उपचार कर उन्हें अच्छे इलाज के लिए यहां से अंबिकापुर और रांची रेफर किया जाता है। उन्हें एएलएस एंबुलेंस के माध्यम से ही रेफर किया जाता है। कई बार देखा जाता है कि रेफर किए गए घायलों को अचानक वेंटिलेशन की जरूरत पड़ती है पर बीएलएस एंबुलेंस में इसकी सुविधा नहीं होने से कई घायल मरीज रेफर होने के बाद अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देते हैं। एक जानकारी के मुताबिक एक वर्ष में 108 संजीवनी के माध्यम से जिले के अस्पतालों में 1500 से अधिक सड़क हादसों के मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाता है। जिनमें से अधिकांश घायलों को उच्च उपचार के लिए यहां से रेफर कर दिया जाता है।

एक दो दिनों में आ जाएगा एक एंबुलेंस
जिले को सीजीएमएससी द्वारा एक ट्रामा एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया है, जो एक दो दिनों में जिले में पहुंच जाएगा। वहीं एक एंबुलेंस डीएमएफ मद से खरीदी की जा रही है। डीएमएफ मद से एंबुलेंस खरीदने के बाद जिले में दो ट्रामा एंबुलेंस हो जाएंगे।'' डॉ.पी सुथार, सीएमएचओ, जशपुर



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