कोरोना संक्रमण की संभावनाओं के कारण अभी भी शैक्षणिक संस्थाओं के खुलने के संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में बच्चों की पढाई-लिखाई को जारी रखना एक बड़ी चुनौती है। जिसके मद्देनजर शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण के दौर मे बच्चों की पढाई जारी रखते हुए वर्चुअल क्लास लेने का फरमान जारी किया था।
कोरोना संक्रमण के बढते दौर मे शिक्षकों को मोहल्ला क्लास लगाने से होने वाली परेशानियों को लेकर दैनिक भास्कर ने 22 अक्टूबर के अंक में मोहल्ला क्लास से होने वाली परेशानियों पर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसको लेकर डीईओ ने मोहल्ला क्लास के लिए आदेश दिया हैै कि मोहल्ला क्लास लगाना अनिवार्य नहीं है। यह शिक्षकों की स्वयं की रूचि पर है। डीईओ एन कुजूर ने कहा कि मोहल्ला क्लास के नाम पर यदि कोई शिक्षक स्कूल खोलकर क्लास लगाता है तोकार्रवाई भी होगी। टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव व मीडिया प्रभारी अफरोज खान ने डीईओ के आदेश को सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से शिक्षक,पालक व बच्चो के लिए राहत भरी खबर है।
कई शिक्षक हुए काेरोना संक्रमण के शिकार
वर्चुअल क्लास के बाद मौखिक रूप से कई आदेश संबंधित विभाग की ओर से जारी किए गए। ऐसा ही एक मौखिक आदेश में विभाग की ओर से कोरोना संक्रमण के बीच शिक्षकों को मोहल्ला क्लास लेने पर दबाव बनाया जा रहा था। शिक्षा विभाग ने स्व-प्रेरणा व स्वेच्छा से नवाचार के तहत मोहल्ला क्लास लगाने के निर्देश दिए थे। परन्तु शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जिले में इस कार्य को शिक्षकों को दबाव डालकर करा रहे थे, इतना ही नही कुछ शिक्षक तो अधिकारियों के दबाव के कारण मोहल्ला क्लास के नाम से स्कूल ही खोल दिए थे और बाकायदा स्कूल कैम्पस में मोहल्ला क्लास लगा रहे थे। कोरोना संक्रमण काल में बच्चों को मोहल्ला क्लास के माध्यम से पढ़ाने का कार्य तो जारी था,लेकिन पढाई के कारण बच्चो के साथ शिक्षकों की भी जान-मान पर खतरा मंडराने लग गया। लगातार जिले मे बढते संक्रमण के बीच कई शिक्षक भी कोरोना पाॅजिटिव आ गए।
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