मध्यप्रदेश में इंस्पेक्टर को डीएसपी की तरह राजपत्रित अधिकारी का दर्जा है। उन्हें राजपत्रित श्रेणी-2 कहा जाता है। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ में इस संबंध में कोई पहल नहीं की जा रही है। इसे लेकर इंस्पेक्टर में नाराजगी है। खासकर दस साल की सेवा पूरी कर चुके करीब पौने दो सौ इंस्पेक्टर में इस बात की सुगबुगाहट चल रही है कि उन्हें राजपत्रित श्रेणी-2 घोषित किया जाए। इसमें कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि दस साल की सेवा के बाद इंस्पेक्टर को पहले ही डीएसपी की तरह वेतनमान मिलता है। पुलिस महकमे में प्रमोशन में देरी और दोहरे मापदंडों के कारण नाराजगी है। ताजा मसला पुलिस इंस्पेक्टर को राजपत्रित श्रेणी-2 घोषित करने का है। इससे पुलिस इंस्पेक्टर डीएसपी की तरह बड़े मामलों की जांच करने से लेकर राजपत्रित अधिकारी की तरह अटेस्टेड करने के पात्र हो जाएंगे। राजपत्रित श्रेणी-2 के इंस्पेक्टर के संबंध में सीधे गृह विभाग से आदेश-निर्देश होंगे। पुलिस इंस्पेक्टरों का तर्क है कि मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद अधिकांश नियम-कायदे लिए गए हैं। मध्यप्रदेश में यह व्यवस्था 2013 से लागू है, लेकिन यहां कोई पहल नहीं की जा रही है। इंस्पेक्टरों का तर्क है कि अनुशासनहीनता के डर से वे अपनी बात वरिष्ठ अधिकारियों या शासन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
कई राज्यों में पहले ही यह व्यवस्था
मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इंस्पेक्टर राजपत्रित श्रेणी-2 के अधिकारी हैं। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ में यह स्थिति है कि सब इंस्पेक्टर भर्ती के बाद कई पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हो जाते हैं तो कुछ ऐसे होते हैं, जिन्हें कुछ महीनों के लिए डीएसपी बनने का मौका मिलता है। इंस्पेक्टर के रूप में दस साल की सेवा के बाद डीएसपी प्रमोशन के लिए पात्र हो जाते हैं। फिलहाल पौने दो सौ इंस्पेक्टर डीएसपी का वेतनमान पा रहे हैं, लेकिन 60 को डीएसपी बनने का मौका मिलेगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3oa9Lfd
via
Comments
Post a Comment