विष्णुदेव साय पहले जशपुर से जड़ी बूटी लेते थे अब वे रायपुर के डॉक्टर से दवा लेने लगे हैं। शायद उनका विश्वास आयुर्वेद पर कम हो गया है। यह बात पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने भास्कर से चर्चा करते हुए सोमवार को कही। दरअसल युद्धवीर ने कल सोशल मीडिया पर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष साय के नाम एक पत्र लिखकर उन्हें खुद मरवाही उपचुनाव लड़ने की सलाह दी थी। इसके बाद प्रदेश भाजपा में राजनीति गरमा गई। साय ने युद्धवीर के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जूदेव परिवार से मेरे संबंध निजी हैं। युद्धवीर मेरा भला चाहते हैं इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने की सलाह दी।
रविवार को चंद्रपुर के पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह ने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय को मरवाही से उपचुनाव लड़ने का सुझाव दिया। पत्र में उन्होंने लिखा कि जब-जब आप प्रदेशाध्यक्ष बने, विपरीत परिस्थितियों में भी आपने पार्टी को उच्च शिखर पर पहुंचाया। यही वजह है कि हमारी पार्टी की सरकार छत्तीसगढ़ में 15 सालों तक रही। आप प्रदेशाध्यक्ष हैं और क्षेत्रवार, समाजवार और लोकप्रिय लोगों की टीम बनाई है। मरवाही में चूंकि जातिगत समीकरण भी है और आप कंवर समाज के प्रदेश ही नहीं देश के प्रमुख नेताओं में से हैं और साथ ही आदिवासी भाई बहनों में आपकी लोकप्रियता की सानी नहीं है । मेरा आग्रह है कि वर्तमान समय की मांग और कार्यकर्ताओं की इच्छा के साथ मेरी भी इच्छा है विष्णुदेव स्वयं मरवाही विधानसभा का नामांकन भरकर चुनाव लड़ें । इस पत्र के बाद घमासान शुरू हो गया।
आदिवासी नेतृत्व की मांग उठती रही है इसलिए साय जीत सकते हैं: युद्धवीर
सोमवार को भास्कर से बात करते हुए युद्धवीर ने कहा, मैं विष्णुदेव का शुभचिंतक हूं। मरवाही में पहले दो दलों की लड़ाई होती थी और कांग्रेस जीत जाती थी। अब वहां तीन दलों के बीच मुकाबला है। 40 फीसदी कंवर वोटर हैं। साय खुद इसी समाज से हैं। प्रदेश में बीच-बीच में आदिवासी नेतृत्व (मुख्यमंत्री) की मांग उठती रही है। ऐसे में साय खुद चुनाव लड़ेंगे तो जीत जाएंगे।
केंद्रीय चुनाव समिति तय करती है कौन कहां से चुनाव लड़ेगा: विष्णदेव
बीजेपी में कोई व्यक्ति तय नहीं करता है कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा। केंद्रीय चुनाव समिति डॉ गंभीर को मरवाही उपचुनाव के लिए पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। राजनीति में दिलीप सिंह जूदेव मेरे आदर्श रहे हैं । उस परिवार द्वारा मौखिक और पत्र द्वारा बहुत सी बातें बताई जाती है। राजपरिवार मेरा शुभचिंतक है। मेरे हित में सोचता है।
युद्धवीर के बयान के मायने क्या...
दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद रमन ‘राज’ में युद्धवीर हाशिये पर डाल दिए गए। पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत पार्टी में वापस लाए गए व रणविजय सिंह को तवज्जो दी गई। रणविजय को राज्यसभा भी भेजा गया। विधायक बनने के बाद युद्धवीर को मंत्री न बनाकर संसदीय सचिव बनाया। तब से मौका-बेमौका युद्धवीर भाजपा नेतृत्व व रमन सिंह पर निशाना साधते रहे हैं। उनका दर्द यह भी है कि विष्णुदेव साय का राजनीतिक कद बढ़ाने में दिलीप सिंह जूदेव का हाथ रहा है पर रमन सिंह के सीएम रहते हुए पहली बार अध्यक्ष बनने के बाद विष्णुदेव रमन सिंह के नजदीक हो गए । जब पार्टी में उनकी अनदेखी होती रही तो विष्णुदेव साय ने मुखर होकर उनका साथ नहीं दिया।
बहुजन हिंदू महासभा का गठन कर चुके हैं युद्धवीर
युद्धवीर की लोकप्रियता कम हो गई है ऐसा नहीं है लेकिन वे भाजपा से खुश नहीं हैं। उन्होंने एक नया संगठन बनाया है, जिसे बहुजन हिन्दू महासभा जूदेव का नाम दिया है। हालांकि अभी इस संगठन का विस्तार नहीं किया गया है। लेकिन जूदेव ने इसी महासभा के अध्यक्ष के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है।
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