कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि कोर्ट में आरोपियों को पेश करने से पहले उनका कोविड टेस्ट कराना अनिवार्य होगा। ऐसे आरोपियों का एंटीजन टेस्ट कराया जाएगा, रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। कलेक्टर डाॅ एस.भारतीदासन ने अपने आदेश में कहा है कि जिले के अंतर्गत शांति भंग करने वाले ऐसे लोग जिन पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही या धारा के तहत एफआईआर दर्ज की गई है या जिन पर कार्रवाई की जा रही है ऐसे सभी आरोपियों को सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश करने से पहले थाना प्रभारियों को इस्तागासा जमा करना होगा। इसके साथ ही उन्हें एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट भी पेश करनी होगी। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद
उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
कलेक्टर को इस बात की शिकायत मिली थी कि कहीं भी घूमने और संदिग्ध लोगों को पर कार्रवाई की जाती है तो ऐसे लोग कोरोना को लेकर लापरवाही बरतते हैं। जिससे कई अफसर कोरोना पॉजिटिव हो गए। इसलिए ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए ही अब एंटीजन टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट में कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव आता है तो उसे डेडिकेटेड कोविड-19 केयर सेंटर या अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। उसके ठीक होने के बाद फिर से उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद अफसर केस की सुनवाई करेंगे। इस काम में कोई भी थाना प्रभारी लापरवाही बरतेगा तो उस पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंधात्मक धाराओं की सुनवाई करने वाले अपर और डिप्टी कलेक्टरों से भी कहा गया है कि वे पहले कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट देेखें और उसके बाद ही सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करें। अफसरों का दावा है कि जिले में हर दिन 2500 से ज्यादा कोरोना सैंपलों की जांच की जा रही है। इनमें से करीब 600 टेस्ट आरटीपीसीआर, 1600 टेस्ट रेपिड एंटीजेन और करीब 300 जांच ट्रू नाॅट से हो रही है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3jl3oCn
via
Comments
Post a Comment