शारदीय नवरात्र में धार्मिक आस्था पर कोरोना भारी है इसलिए पहली बार ऐसी स्थिति बन रही है कि 500 से ज्यादा गांवों में प्रतिमा स्थापना नहीं होगी। इसके लिए सामूहिक निर्णय ले चुके है। जिले में 8 शहरी क्षेत्र और 700 से ज्यादा गांव है। इस लिहाज से अधिकांश गांवों में नवरात्रि में रौनकता नहीं रहेगी। न माता सेवा का आयाेजन होगा और न ही भक्तिमय माहौल रहेगा।
तरौद, सिवनी, भोथली, बघमरा, ओरमा, घुमका, कोहंगाटोला, भोथीपार सहित अधिकांश गांवों में मूर्ति स्थापना नहीं करने का निर्णय लिया गया है। जोत जलाकर दुर्गोत्सव समिति व गांव प्रमुखों की ओर से क्षमा याचना की जाएगी यानी पूजा पाठ कर इस साल मूर्ति स्थापना नहीं करने को लेकर क्षमा मांगेंगे। कोरोना के केस लगातार मिल रहे है। इसके अलावा गाइडलाइन की बंदिशें भी है इसलिए दुर्गोत्सव समिति रिस्क नहीं लेना चाह रहे है। सिवनी के सरपंच दानेश्वर सिन्हा ने बताया कि हर साल सरस्वती माता की प्रतिमा रखते आ रहे थे इस बार तैलचित्र रखकर पूजा पाठ करेंगे।
दुर्गा समितियों को इसका खास ध्यान रखना होगा
मूर्ति की ऊंचाई 6 फीट से कम, एक से दूसरे पंडाल की दूरी 250 मीटर से ज्यादा, आकार 15 फीट से कम रखना होगा। 3000 वर्ग फीट की खुली जगह हो। सड़क व गली का हिस्सा प्रभावित न हो। पंडाल के सामने बैठने के लिए अलग से व्यवस्था न हो।
सर्दी और बुखार होने पर पंडाल में नहीं देंगे प्रवेश
किसी को बुखार, सर्दी, खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो तो पंडाल में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति की रहेगी। सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर, हैंड वाश की व्यवस्था करना पड़ेगा। सोशल डिस्टेंस का पालन करना होगा।
केस मिलने पर तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी
यदि पूजा अर्चना के दौरान भी संबंधित क्षेत्र कंटेनमेंट जोन घोषित हो जाता है तो तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी। किसी भी प्रकार के भोज, भंडारा, जगराता या सांस्कृतिक कार्यक्रम कराने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना के दौरान किसी प्रकार
शहर में इन स्थानों पर होगी प्रतिमा स्थापित
शनिवार को शहर के गंगासागर तालाब पार, नयापारा, पुराना बस स्टैंड, शिकारीपारा, कुंदरूपारा, बुधवारी बाजार, गांधी भवन के पास देवी प्रतिमा स्थापना होगी। शुक्रवार को दुर्गोत्सव समितियां तैयारियां करते रहें। वहीं मूर्तिकार मूर्ति को अंतिम रूप देते रहें।
रजिस्टर में लिखेंगे भक्त का डिटेल
दर्शन के लिए पहुंचने वाले हर भक्त का नाम-पता और मोबाइल नंबर भी समितियों को रजिस्टर में लिखकर रखना होगा। यहां अगर कोई भक्त कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो इलाज का पूरा खर्च समितियों को उठाना होगा।
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