बीएसएफ से छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा में शामिल हुए अधिकारी यशपाल सिंह के खिलाफ अब राज्य के पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। यशपाल सिंह के खिलाफ आईपीएस एसोसिएशन से मदद मांगी गई है। साथ ही, ईओडब्ल्यू में आय से अधिक संपत्ति के मामले की शिकायत पर जल्द जांच की मांग की गई है। दरअसल, यह पूरा मामला आईपीएस अवार्ड से जुड़ा है। यशपाल सिंह को बीएसएफ से छत्तीसगढ़ पुलिस में शामिल करने के फैसले के कारण राज्य के अधिकारियों का हित प्रभावित हो रहा है।
यशपाल सिंह बीएसएफ की सेवा छोड़कर 2010 में छत्तीसगढ़ आए थे। उन्हें रमन सरकार ने एडिशनल एसपी बना दिया। साथ ही, राज्य गठन के पूर्व 1997 कैडर आबंटित कर दिया। फिलहाल जिन 6 अधिकारियों को आईपीएस अवार्ड होना है, उनमें दो पद बाहरी अधिकारियों के कारण प्रभावित हो रहे हैं। पहले नंबर पर धर्मेंद्र छवई हैं, जो पहले छत्तीसगढ़ नहीं आना चाहते थे, लेकिन यहां ज्वाइन कर लिया। दूसरे नंबर पर दर्शन सिंह मरावी और तीसरा नंबर यशपाल सिंह का है। सबसे ज्यादा आपत्ति यशपाल सिंह से है, क्योंकि डीएसपी के रूप में ट्रेनिंग और काम किए बिना उन्हें सीधे एएसपी बना दिया गया।
अब आईपीएस अवार्ड के लिए भी उन्हें शामिल किया जा रहा है, जबकि पुलिस अधिकारी के रूप में न ही ट्रेनिंग हुई है और काम का अनुभव भी नहीं है। इस मसले पर आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष स्पेशल डीजी अशोक जुनेजा ने जरूरी मदद करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, ईओडब्ल्यू के डीआईजी आरिफ शेख ने भी जांच कराने की बात कही है। बताया गया है कि पिछले सप्ताह ईओडब्लू ने ही गृह विभाग और पीएचक्यू को पत्र भेजकर यशपाल सिंह के खिलाफ मामले की शिकायत होने की सूचना दी थी। इसके चलते उनका नाम अवार्ड के लिए विचारण के दायरे में नहीं आ पाएगा।
टंडन और भगत को मौका नहीं
धर्मेंद्र छवई और यशपाल सिंह की वजह से छत्तीसगढ़ गठन के बाद से ही इस कैडर में शामिल सीडी टंडन और सुरजनराम भगत को मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि जिन 6 लोगों के नाम हैं, उनमें धर्मेंद्र छवई, दर्शन सिंह मरावी, यशपाल सिंह, उमेश चौधरी, मनोज खिलारी और रवि कुर्रे हैं। इस पर सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी तो छत्तीसगढ़ के अधिकारी टंडन, भगत, प्रफुल्ल ठाकुर आदि को अगली बार के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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