सेहतमंद बने रहने के लिए अभी सब्जियां खाने से बेहतर फल खाना है। लोकल बाजार में सब्जियों के दाम इतने महंगे हैं कि फल इनके सामने बैने हैं। कश्मीर व हिमाचल से आने वाले सेव से महंगी फूलगोभी बिक रही है। टमाटर संतरे से महंगा हो गया है।
सब्जियों के दाम सुनकर ग्राहकों के पसीने छूट रहे हैं। जो सब्जियां ग्राहक किलो में खरीदते थे अब उसे पाव में खरीद रहे हैं। घर का बजट गड़बड़ा रहा है। इधर फल काफी हद तक लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। संतरा, मौसमी, केला एवं पपीता के दाम आलू-प्याज, मिर्च-टमाटर व धनिया तक से सस्ते हैं। फल विक्रेताओं का कहना है कि संतरा, मौसमी व माल्टा का 2-3 महीने का मुख्य सीजन रहता है और जो भाव 15 दिन पहले थे उनमें कमी आई है। आगे भी इनकी आवक बढ़ने की उम्मीद है। इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। हिमाचल किन्नौर से अगस्त में और कश्मीरी सेव सितंबर माह से ही आना शुरू हो गई थी। अब आवक में तेजी आई है। केला, मौसमी, पपीता, संतरा व सेव के सामान्य भाव सब्जियों से भी सस्ते हैं।

एक-एक ग्राम का हिसाब - सब्जियाें की बिक्री में एक-एक ग्राम का हिसाब रखा जा रहा है। अधिकांश कोचियों ने सब्जी बेचने के लिए इलेक्ट्रानिक कांटा रखा है। तौल में एक ग्राम भी ऊपर नीचे होने पर उसके अधिक पैसे जोड़े जा रहे हैं।
कोचियों ने बढ़ा दिए हैं
सब्जियों के भाव
ऐसा नहीं है कि सब्जियों का उत्पादन नहीं होता है। लॉकडाउन के वक्त सब्जियों के दाम में भारी गिरावट थी क्योंकि लोकल सब्जियां बिक रही थी और माल बाहर नहीं जा पा रहा था। पर परिवहन शुरू होते ही कोचिए सक्रिय हो गए हैं। वे कम कीमत पर सब्जियां खरीद लेते हैं और उसे तीन से चार गुनी कीमत पर बेचते हैं। जो ग्रामीण सब्जी विक्रेता खुद बिक्री के लिए बैठते हैं उन्हें भी अधिक कीमत पर बेचने को कहा जाता है। इससे ग्रामीण विक्रेताओं की जो सब्जी नहीं बिक पाती है उसे बाद में कोचिए कम कीमत पर खरीद ही लेते हैं।
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