पीडब्ल्यूडी में प्रमोशन के लिए तय पदों से ज्यादा सब इंजीनियरों को असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) बना दिया गया। इसके बाद प्रमोशन के लिए कोई पद नहीं बचे थे, लेकिन सीधी भर्ती से असिस्टेंट इंजीनियर चुने गए 42 कैंडीडेट के होते हुए 21 सब इंजीनियरों को फिर से प्रमोशन दिया गया। सीधी भर्ती वाले असिस्टेंट इंजीनियरों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हालांकि इस पूरे मामले में पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने विधि विभाग से सलाह लेकर कार्रवाई करने की बात कही है, जिससे योग्य इंजीनियरों को नुकसान न हो। पूरा मामला 2008 की सीधी भर्ती के असिस्टेंट इंजीनियर और सब इंजीनियरों के प्रमोशन से जुड़ा है। पीडब्ल्यूडी ने निर्धारित कोटे से ज्यादा 135 सब इंजीनियरों को 31 जुलाई 2008 में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद दो अगस्त 2008 को सीधी भर्ती से 42 असिस्टेंट इंजीनियर चुने गए। इसके बाद प्रमोशन के लिए कोई पद नहीं होने के बावजूद 19 सितंबर 2008 को 21 और सब इंजीनियरों को असिस्टेंट इंजीनियर बना दिया गया। असिस्टेंट इंजीनियर से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर प्रमोशन के बाद ये पद खाली हुए थे। सीधी भर्ती वाले असिस्टेंट इंजीनियर का कहना है कि इस पर उनका पहला हक है। इसमें धांधली की गई है। ऐसे में प्रमोटी इंजीनियर प्रमोट होकर उनके ऊपर बैठ जाएंगे।
12 साल से चल रही लड़ाई
सीधी भर्ती से चुने गए 42 असिस्टेंट इंजीनियर पिछले 12 साल से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने 6 बार विभाग के सचिव को जानकारी दी, लेकिन बात नहीं बनी। अब पीडब्ल्यूडी मंत्री को जानकारी दी गई है। इस संबंध में पीएससी अध्यक्ष, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री सचिवालय को भी प्रमोशन में हुई गड़बड़ी के बारे में बताया गया है।
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