जॉन राजेश पॉल | प्रदेश में नियम कानूनों के दांव-पेंच और विभागों और स्कूल प्रबंधनों की मनमानी में सैकड़ों कर्मचारियों के ग्रेच्युटी को करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं। जीवनभर सेवा के बाद अपना हक लेने दफ्तरों व अदालतों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। हाईकोर्ट के फैसले के सात महीने के बाद भी उन्हें हक नहीं मिला। इन 409 अनुदान संस्थाओं में करीब 95 हजार कर्मचारी हैं।
केवल रायपुर जिले में ही अनुदान प्राप्त स्कूलों के करीब 50 कर्मचारियों को चार करोड़ 50 लाख रुपए ग्रेचुएटी के नहीं मिले हैं। इसी तरह 1 अप्रैल 2013 के पहले तक 150 शिक्षकों का साढ़े चार से पांच करोड़ रुपए बकाया था। अब सात सालों में इस राशि और कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है। सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी ग्रेच्युटी न मिलने पर अपना पारिवारिक दायित्व पूरा करने में असमर्थ हैं। ग्रेच्युटी दिलाने के नाम पर उनके दफ्तरों के बाबू ने उनसे पहले ही रुपए ऐंठ लिए हैं। इधर, सरकारी विभागों और संस्था प्रबंधनों के बीच विवाद इस बात को लेकर है कि सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी कौन देगा। सरकार कहती है कि जो संस्थाएं सरकार की मदद से चल रही हैं उन्हें ग्रेच्युटी उनके एम्प्लॉयर यानी संस्थान देंगे। संस्थान कहते हैं सरकार देगी। महावीर शिक्षण प्रसार समिति रायपुर समेत कुछ स्कूलों ने ये केस हाईकोर्ट में लगाया था। 6 मार्च 2020 को जस्टिस गौतम भादुड़ी ने फैसला दिया है कि राज्य शासन नियोक्ता की परिभाषा में आएगा। 1972 के एक्ट में एडेड स्कूल के स्टाफ को सरकार के कर्मचारी माना गया। जितनी अनुदान प्राप्त संस्थाएं हैं उनमें जितने पदों पर कर्मचारियों काम कर रहे हैं तथा सरकार वेतन देती है। उन्हें ग्रेच्युटी भी सरकार देगी। छह महीने में सरकार उन्हें पैसा लौटाए।
एक नजर में
- 1 लाख शिक्षक व स्टाफ
- 0409 स्कूल
- 043 स्थानीय निकाय
- 0367 मदरसा
पुराना विवाद है
बताते हैं कि 3 अप्रैल 1997 को केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें अनुदान प्राप्त व प्राइवेट शैक्षणिक संस्थानों जिनमें कर्मचारियों की संख्या दस या ज्यादा है वहां ये नियम लागू होगा। चाहे वे एडेड संस्थाएं हैं या अनएडेड, लेकिन जब कर्मचारी सेवानिवृत्त होने लगे तो संस्थाओं ने उन्हें ग्रेच्युटी नहीं दी। मामले हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे।
तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिफिकेशन में कर्मचारी की ऐसी परिभाषा बनाई गई है कि शिक्षक तक उसमें नहीं आते। उसने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि इस कानून में संशोधन करे। तब केंद्र सरकार ने 2009 में अमेंडमेंट एक्ट लाया। 31 दिसंबर 2009 को कर्मचारी की परिभाषा संशोधित की गई। नोटिफिकेशन से कुछ शब्द बदलने पर कर्मचारियों में शिक्षक, मैनेजर से लेकर सभी स्टाफ कवर हो गए। इसके बाद शिक्षकों ने अपने हक के लिए कोर्ट में केस लगाना शुरू किया। महावीर शिक्षा समिति के 7-8 शिक्षकों ने केस जीत लिया। कुछ संस्थाएं हाईकोर्ट तक गईं। राज्य सरकार ने नया आदेश निकाला कि 1 अप्रैल 2013 के बाद रिटायर होने वाले एडेड संस्थानों के स्टाफ को सरकार ग्रेच्युटी देगी।
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