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पहली बार कोरोनाकाल में 905 जोत जलेंगी ऑनलाइन दर्शन पर आज स्थिति होगी स्पष्ट

कोरोनाकाल में शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहा है। जिले के सबसे बड़े धार्मिक आस्था का केंद्र झलमला के गंगा मैया मंदिर में इस बार गाइडलाइन के चलते श्रद्घालुओं की नो एंट्री रहेगी। वर्ष 1977 में मंदिर जीर्णोद्धार के बाद कोरोनाकाल में पहली बार यहां 905 ज्योति कलश की स्थापना होगी। जिसमें घी के 102, शीतला मंदिर के 50 ज्योति कलश भी शामिल है। जिसे गंगा मैया मंदिर के नाम से ही जलाई जाएगी। 1977 में यहां पहली बार 4 ज्योति कलश की स्थापना की गई थी। मंदिर ट्रस्ट प्रमुख सोहनलाल टावरी ने बताया कि इस बार यहां नवरात्र के अंतिम दिन तक घर या कहीं से भी लोग ऑनलाइन दर्शन कर सकें इसके लिए यहां व्यवस्था बनाई जा रही है। यह आज स्पष्ट होगी।

पिछले साल सवा 2 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किया
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार पिछले साल शारदीय नवरात्र में लगभग सवा 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे थे। तब मेला भी लगा था। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था।

अंग्रेजों के शासनकाल में यहां डबरी खुदाई किए थे
अंग्रेजों के शासनकाल में यहां पर डबरी की खुदाई की गई। जिसे बांधा तालाब नाम दिया गया। मां गंगा मैया के प्रादुर्भाव की कहानी इसी तालाब से शुरू हुई है।



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For the first time, the situation will be clear today on 905 land holdings in the coronary


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