एमआरआई मशीन लगाने में देरी से डीएमएफ राशि हो चुकी लैप्स, एसईसीएल ने दोबारा 7 करोड़ बजट दिया, लेकिन डीएमई के कागजी पचड़े में काम अटका
मेडिकल काॅलेज अस्पताल के रेडियोलाजी विभाग में मरीजों की बेहतर जांच की सुविधा देने एमआरआई मशीन लगनी है। इसके लिए एसईसीएल ने पिछले बजट में ही 7 करोड़ का बजट डीएमएफ से काॅलेज प्रबंधन को दिया था, लेकिन कागजी लेटलतीफी से खरीदी नहीं हो पाई।
तब वित्तीय सत्र के अंतिम चरण में प्रबंधन ने खरीदी का आनन-फानन में टेंडर निकाला, लेकिन सिर्फ एक फर्म का आवेदन आने से टेंडर किसी काम का नहीं रहा और बजट भी लैप्स हो गया। अब काॅलेज प्रबंधन के आग्रह पर इस सत्र में एसईसीएल ने बजट दोबारा आवंटित तो कर दिया, लेकिन खरीदी की प्रक्रिया में अब तक तकनीकी समिति व क्रय समिति की बैठक तक नहीं हुई।
इसे लेकर कवायद ही चल रही है। समिति का गठन तो कर दिया और अब अगले सप्ताह बैठक होने की बात कही जा रही है। इस सत्र में आधे से ज्यादा समय निकल गया है, लेकिन इसको लेकर तेजी नहीं दिख रही है।
मेडिकल कॉलेज में मशीन लगाने के काम में देरी से दोबारा बजट लैप्स होने का खतरा
1.5 टेस्ला की लगनी है एमआरआई मशीन
अस्पताल में जो एमआईआर मशीन लगनी है, वह 1.5 टेस्ला की होगी। टेस्ला मशीन की क्षमता की ईकाई है। वैसे अभी 3 टेस्ला तक की मशीनें आ गई है, जिसकी फोटो कम समय में काफी साफ आती है। ज्यादा टेस्ला की मशीन की कीमत भी अधिक होती है। हालांकि डाॅक्टर 1.5 टेस्ला मशीन को मेडिकल काॅलेज की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मानते हैं।
भवन निर्माण से लेकर इंस्टालेशन का काम एक ही फर्म करेगी
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मशीन का पूरा काम एक ही फर्म करेगा। इसमें भवन निर्माण के साथ मशीन इंस्टालेशन का काम शामिल है। क्योंकि कई बार दूसरी फर्म भवन बनाती है तो मशीन इंस्टालेशन के अनुसार उसके मापदंड में कमी आ जाती और फिर तोड़फोड़ करनी पड़ती है। सीटी स्कैन मशीन के स्टालेशन समय ऐसा ही हुआ था।
अभी जांच के लिए प्राइवेट अस्पताल पर निर्भर हैं मरीज
मेडिकल काॅलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन नहीं होने से मरीज जांच के लिए पूरी तरह प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक पर निर्भर हैं। शहर में कई प्राइवेट फर्माें ने एमआरआई मशीन काफी पहले ही लगा ली है। अभी एक जांच के लिए यहां 5 से 7 हजार रुपए तक शुल्क निर्धारित है। यह कई बार जांच के अनुसार बढ़ता भी है।
दोबारा टेंडर निकाल कर काम जल्द पूरा करेंगे
अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया तेजी में है। मंगलवार को क्रय समिति की बैठक बुलाई गई है। पहले टेंडर में सिर्फ एक ही फर्म का आवेदन आया है, इसलिए वह मान्य नहीं है। इसलिए दोबारा टेंडर निकाला जाएगा और इसी साल मशीन लग जाएगी।
डाॅ. आरके सिंह, डीएमई, छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग, रायपुर
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