विधानसभा थाना क्षेत्र में दो साल पहले युवक की हत्या मामले में गिरफ्तार 6 आरोपियों को कोर्ट ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया है। उनके खिलाफ पुलिस कोर्ट में पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाई। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश जून ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। कोर्ट के अनुसार हत्या के मामले में काफी लापरवाही बरती गई और निम्न स्तर की जांच की गई हैं। कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन विधानसभा थाना टीआई लक्ष्मण कुमेठी और टीआई अश्वनी राठौर पर विभागीय जांच करने गृह सचिव को पत्र भेजा है।
मिली जानकारी के अनुसार परमानंद चतुर्वेदी का अक्टूबर 2018 में नहर के किनारे शव मिला था। पैतृक संपत्ति को लेकर मृतक परमानंद का अपनी चाची भगवती के साथ विवाद चल रहा था। मृतक अपने चाची को डरा धमका कर संपत्ति का कब्जा करने की कोशिश कर रहा था।
भगवती ने इस बात को अपनी सास फूल बतिया चतुर्वेदी को बताया और दोनों ने समधी उमाशंकर को बुलाया और परमानंद को जान से मारने कहा। उमाशंकर अपने साथ कैलाश कुमार घृतलहरे, धर्मेंद्र कुमार जांगड़े, हरीश कुमार पटेल को लेकर पहुंचा। सभी ने परमानंद को जान से मारने की प्लानिंग की। प्लान के मुताबिक 1.50 लाख रुपए की सुपारी दी गई और सकरी में परमानंद की हत्या हुई। पुलिस जांच के दौरान आरोपियों की आपस में कोई कड़ी नहीं जोड़ पाई। यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि मृतक और उसके चाची के बीच कोई संपत्ति विवाद था। मृतक की चाची ने उमाशंकर को हत्या के लिए सुपारी दी थी। उनके बीच पैसों को लेनदेन हुआ था।
इसलिए कोर्ट ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट के अनुसार जांच अधिकारी लक्ष्मण कुमेठी ने निम्न स्तर की विवेचना आरोपियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाना प्रतीत होता है। थाना प्रभारी अश्वनी राठौर ने भी मामले में अंतिम प्रतिवेदन पेश करते समय सभी साक्ष्यों का सही अवलोकन नहीं किया। काेर्ट ने दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने गृह सचिव से जांच करने और जांच रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराने की अनुशंसा की है।
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