घर-मंदिरों में करेंगे कलशा शृंगार क्योंकि 5 दिन में जंवारा ज्योत तक पहुंचा, अब नया दीपक चढ़ाकर बढ़ाएंगे ऊंचाई
बुधवार को नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। इस मौके पर जिन घर, मंदिर और पंडालों में जंवारा बोया गया है, वहां कलशा शृंगार किया जाएगा। इसके तहत कलश के नीचे एक नया दीपक रखा जाएगा, ताकि पांच दिन में बढ़ चुके जंवारे से ज्योत की ऊंचाई बढ़ाई जा सके। जिन घरों और पंडालों में जंवारा की स्थापना की गई है वहां भी यह परंपरा निभाई जाएगी। दरअसल, नवरात्रि के पहले दिन बहुत सी जगहों पर जंवारे के ऊपर ज्योत की स्थापना की जाती है। 5 दिन में जंवारा बड़ा होकर ज्योत तक पहुंचने लगता है। कई बार यह ज्योत से ऊचर भी चला जाता है। इसीलिए नवरात्रि के पांचवे दिन कलशा शृंगार किया जाता है। इसके तहत ज्योत कलश के नीचे एक नया दीपक रखा जाता है। इससे ज्योत के दीपक की ऊंचाई बढ़ जाती है और वह जंवारे से ऊंचा हो जाता है। इसके बाद अष्टमी तक ज्योज-जंवारे की नियमित पूजा की जाएगी। नवमी को विसर्जन जुलूस निकालकर इनका विसर्जन कर दिया जाएगा।
आज से ही जसगीत गायन की भी होती है शुरुआत
महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला बताते हैं कि नवरात्रि में 9 दिनों में पंचमी का विशेष महत्व है। यह नवरात्रि की मध्यतिथि है। छत्तीसगढ़ में चतुर्थी तिथि तक माता की स्तुति की जाती है। पंचमी से माता के जसगीतों का गायन किया जाता है। गांव-गांव में जगराता जैसे कार्यक्रम शुरू होते हैं, लेकिन इस बार कोविड 19 के संक्रमण के चलते ऐसे कोई कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे। वहीं मंदिरों में बुधवार से माता का विशेष शृंगार किया जाएगा। नवमी तक माता रोज विशेष शृंगार में नजर आएंगी।
आज से आठों भुजाओं में शस्त्र लिए दिखेंगी कंकाली
कंकालीपारा में माता कंकाली की अष्टभुजी प्रतिमा स्थापित है। सालभर यहां माता अपने हाथों में शास्त्र, कमंडल आदि धारण किए होती हैं, लेकिन साल में सिर्फ 10 दिन ऐसे होते हैं जब माता के आठाें भुजाओं में शस्त्र होते हैं। यह माता का रौद्र रूप है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में पंचमी से नवमी तक माता इस रूप में दर्शन देती हैं। इस बार बुधवार से माता आठों भुजाओं में शस्त्र लिए नजर आएंगी।
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