कोरोना संक्रमण में नजर आ रही कमी का बड़ा असर यह भी है कि राजधानी-प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी कोविड सेंटरों में से एक अंबेडकर अस्पताल के आईसीयू में अब कोरोना का एक भी मरीज भर्ती नहीं है। अंबेडकर अस्पताल में कोरोना काल में 3663 संक्रमित इलाज के लिए भर्ती हुए थे। इसमें से 3367 मरीज स्वस्थ होकर लौट गए। इनमें लगभग 50 बुजुर्ग भी हैं जिन्होंने आईसीयू में कोरोना से एक-एक माह लंबी लड़ाई लड़ी और इस बीमारी को हराने में कामयाब हो गए। ज्यादातर की उम्र 80 साल के आसपास या इनसे ऊपर थी।
अधिकांश बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना के अलावा दूसरी गंभीर समस्याएं थीं और उन्हें सांस में तकलीफ जैसी गंभीर स्थिति के बाद अंबेडकर के आईसीयू में भर्ती किया गया था। हालांकि इस अस्पताल में इतने मरीजों के स्वस्थ होने के अलावा 205 मरीज कोरोना से जंग हार भी गए। अंबेडकर अस्पताल की कोविड विंग के प्रभारी डा. ओपी सुंदरानी के मुताबिक पांच सौ बिस्तर वाले इस कोविड अस्पताल में एक भी मरीज आईसीयू में नहीं है। यानी पूरा आईसीयू खाली है। इतना ही नहीं तीन सौ से साढ़े तीन सौ के बीच 70 साल से ज्यादा उम्र वाले मरीज सामान्य कोविड वार्ड में रहकर स्वस्थ हुए हैं। बहुत से बुजुर्ग अस्सी साल के पार के भी इस अस्पताल में इलाज के लिए आए, जो अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
हर बाजार में फिर कोरोना सैंपलिंग
स्वास्थ्य विभाग समेत सरकारी एजेंसियां जुलाई की तरह राजधानी में इस हफ्ते के अंत तक शहर के बाजारों में कोरोना सैंपलिंग और सर्वे शुरू कर देगी। इसके लिए रायपुर में सैंपलिंग का लक्ष्य 2440 से बढ़ाकर 3000 किया जाने वाला है। दोबारा कोरोना सैंपलिंग का प्लान इस सर्वे के आधार पर आया है कि अगर लोगों में कोरोना के हल्के लक्षण हैं, वे तब भी जांच करवाने से बच रहे हैं। इसलिए तकनीकी रूप से शहर में कोरोना की सही तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है। कोरोना से मौतें बढ़ने की वजह इसे ही माना गया है।
इसी खामी को दूर करने के लिए सरकारी टीमें बाजारों में सब्जी विक्रेता, किराना और अन्य कारोबारियों की दोबारा सैंपलिंग के लिए निकलने वाली हैं। सीएमएचओ डा. मीरा बघेल ने कहा कि बीमारी छिपे नहीं और बाकी लोग खतरे में न आएं, इसलिए ऐसी सैंपलिंग जरूरी है।
छोटे बच्चों में किसी-किसी को ही गंभीर लक्षण आए
अंबेडकर अस्पताल में कोरोना के इलाज में लगे डाक्टरों ने बताया कि 0 से 10 साल की उम्र के जितने बच्चे अस्पताल में कोरोना संक्रमण के बाद भर्ती किए गए, उनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। अर्थात ये संक्रमण के बावजूद अच्छी स्थिति में भर्ती किए गए और उसी स्थिति में 14 दिन बाद छुट्टी भी हो गई। इनमें से इक्का-दुक्का बच्चे ही थे जिनमें कोरोना के लक्षण जैसे सांस लेने में तकलीफ, स्वाद नहीं आना, गंध नहीं आना आदि देखे गए। लेकिन ये भी स्वस्थ हो गए और इस अस्पताल में बच्चों का रिकवरी रेट काफी अच्छा रहा है। हालांकि डाक्टरों का यह भी कहना है कि यहां जितने भी संक्रमित बच्चे आए, अधिकांश को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।
"अंबेडकर अस्पताल की कोरोना विंग में 80 साल के आसपास की उम्र वाले 50 से ज्यादा बुजुर्गों ने आईसीयू में लंबे अरसे तक रहकर इस बीमारी को मात दी है। अब हालत ये है कि अस्पताल के आईसीयू में एक भी मरीज नहीं है।"
-डा. ओपी सुंदरानी, प्रभारी-अंबेडकर कोविड संस्थान
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3juyt6I
via
Comments
Post a Comment