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2 माह पहले टूटा पुल नहीं बन पाने से नहीं मिल रही हैं स्वास्थ्य सुविधाएं

जिले के अतिसंवेदनशील क्षेत्र गंगालूर को जोड़ने वाला पुल 2 माह पहले बारिश में टूट गया था, जो अब तक नहीं बन पाया है। इसके चलते पीडीएस की गाड़ियों को स्थानीय राशन दुकान तक पहुंचने में परेशानियां हो रही हैं। 5 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में पुल के नहीं बनने से एक बार फिर से नक्सलियों के आतंक के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि गंगालूर के पास आए दिन नक्सली घटना होती रहती है। पुल के नहीं होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसे लेकर ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। बावजूद इसके पुल का निर्माण अब तक जिला प्रशासन द्वारा शुरू नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इस पुल का निर्माण पंचायत द्वारा 2013 में करवाया गया था, जो इस साल हुई बारिश में टूट गया। कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए जल्द ही टेंडर किया जाएगा। बारिश के चलते टूटे पुल के निर्माण में विलंब हुआ है।
वैकल्पिक कोशिश नहीं हो पाई सफल: पुल टूटने के बाद ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी न हो इसलिए पंचायत ने वैकल्पिक व्यवस्था की थी। इस व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री सड़क योजना में विभाग की ओर से पाइप डाल मुरुम बिछाकर व्यवस्था की गई है, जो बीच- बीच में बारिश होने की वजह से काफी ज्यादा खराब हो चुकी है। अब इस रास्ते से पीडीएस की गाड़ियों की आवाजाही बंद हो गई है।

जिला पंचायत सदस्य ने सामान्य सभा में उठाया मामला
पुल नहीं बनने से ग्रामीणों को हो रही इस परेशानी को लेकर गुरुवार को जिला पंचायत सदस्य बी पुष्पा राव ने जिला पंचायत की सामान्य सभा में यह मामला उठाया और इसे जल्द से जल्द बनवाने की मांग की, लेकिन उनकी बातों को किसी ने तवज्जो नहीं दी। इस मामले को लेकर संबंधित विभाग और अन्य जनप्रतिनिधियों से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।



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Health facilities are not available 2 months ago due to the failure of a broken bridge


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