राजधानी दिल्ली के खेतों में पराली के डंठल को खेत में खाद बनाने के डी-कंपोजर घोल के छिड़काव का काम नरेला के हिरंकी गांव से शुरू हो गया। ये डि-कंपोजर घोल पूसा रिसर्च इंस्टिट्यूट ने तैयार किया है। इसकी शुरुआत करते हुए मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की करीब 700 से 800 हेक्टेयर जमीन पर बासमती धान उगाया जाता है।
किसानों को नई फसल के लिए पराली को जलाना पड़ता है। इस पराली को जलाने की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए अब यह घोल खेतों में छिड़का जाएगा। घोल के छिड़काव के लिए ट्रैक्टर और छिड़कने वालों समेत सभी इंतजाम दिल्ली सरकार ने निशुल्क किया है। किसान को इसके लिए कोई शुल्क नहीं है।
नॉर्थ इंडिया को प्रदूषण से बचाने में केंद्र पूरी तरह नाकाम: सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पराली के कारण पूरे उत्तर भारत में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई है। मंगलवार को मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता वार्ता में सिसोदिया ने कहा कि इस साल कोरोना संकट के कारण पराली प्रदूषण काफी जानलेवा है। नॉर्थ इंडिया को प्रदूषण से बचाने में केंद्र सरकार पूरी तरह नाकाम है। सिसोदिया ने कहा कि पराली की समस्या सिर्फ दिल्ली की समस्या नहीं है। यह दिल्ली की देन भी नहीं है।
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