ओडिशा व आंधप्रदेश के तटीय क्षेत्र में द्रोणिका बनने से जिले में 10 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना बनी हुई है। इसी के तहत रविवार की रात व सोमवार को जिले में जमकर बारिश हुई। इसका असर अरली वैरायटी के धान फसल पर हुआ है। बारिश होने से पक चुकी फसल खेतों में गिर गई है, वहीं खेतों में पानी भर जाने से 10 फीसदी तक फसल को नुकसान होने की संभावना कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक जता रहे हैं।
कांकेर जिला में धान का फसल 1 लाख 81 हजार हेक्टेयर के रकबा लगाया गया है। किसानों के अनुसार अब बारिश की जरूरत नहीं है। 29 सितंबर को तेज हवाएं चलने के साथ काफी बारिश हुई थीं। इससे कई गांवों के खेतों में अरली वैरायटी के धान का फसल खेतों में गिर चुकी है। वही रविवार को रात के दौरान एक घंटा तक तेज बारिश हुई। फिर सोमवार को सुबह के दौरान भी बारिश हुई। बारिश से फसल नुकसान का आकंड़ा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार बारिश की वजह से 5 से 10 प्रतिशत धान के फसल को नुकसान होने की संभावना बनी हुई है।
किसानों की परेशानी बढ़ गई : अरली वैरायटी के धान फसल पककर तैयार हो गया था। ऐसे धान के फसल को नुकसान होगा। 29 सितंबर को हुई बारिश में कई जगह खेतों में धान का फसल गिर गया था। 4 व 5 अक्टूबर को हुई बारिश से अब इन खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। ग्राम कोदाभाठ में 5 किसानों का फसल खेतों में गिर गया है। ग्राम कोदाभाठ के किसान रतन साहू ने कहा उनका 4 एकड़ खेत हैं, जिसमें से 2 एकड़ का धान फसल खेत में गिर गया है और खेत में पानी भर गया है। अभी हुई बारिश से खेत में डूबी फसल के लिए पूरी तरह से नुकसान हो गया है। गांवों में सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देना चाहिए। ग्राम आतुरगांव में 10 किसानों के 15 एकड़ धान के फसल को नुकसान हुआ है। किसान ललित साहू ने कहा एकाएक बारिश की वजह से उनका आधा एकड़ का धान फसल गिर गया। गांव में और भी किसान है। जिनका फसल खेतों में गिर गया है, अभी बारिश की जरूरत नहीं थी।
ग्राम लाल माटवाड़ा के कन्हैया सोनकर का डेढ़ एकड़ धान का फसल गिर गया है। गांव के जगदीश सोनी ने कहा अब बारिश की जरूरत नहीं है और अभी बारिश होने से अरली वैरायटी के धान फसल को इससे नुकसान होगा। गांव में 4 किसानों के फसल को नुकसान हुआ है। ग्राम भीरावाही के डुगेश्वर शंकर जैन ने कहा अभी बारिश होने से खेतों में लगे धान के फसल को फायदा की जगह पर नुकसान है। गांव में काफी सारे किसानों का धान फसल खेतों में गिरकर पानी में डूबा है, लेकिन अभी तक राजस्व विभाग व कृषि विभाग का अमला नुकसान का सर्वे करने के लिए नहीं पहुंचा है।
हार्वेस्टर अंदर जाने में होगी दिक्कत
कृषि विभाग के साथ किसानों का मानना है कि अभी बारिश होने से खेत में नमी आ जाएगी और खेत में हार्वेस्टर ले जाने में दिक्कत होगी। कई किसान हार्वेस्टर से ही फसल कटाई कराते हैं। अभी कुछ दिनों में अरली वैरायटी के धान फसल की कटाई शुरू हो जाती, लेकिन इससे धान फसल का कटाई काम प्रभावित होता।
एक दिन की बारिश हुई है
5 अक्टूबर को सुबह 5 बजे तक की स्थिति में एक दिन में कांकेर जिला में 3.9 मिमी बारिश हुई है। इसमें सबसे ज्यादा बारिश अंतागढ़ तहसील में 11.9 मिमी बारिश हुई है। नरहरपुर तहसील में 6.7 मिमी बारिश हुई है। कांकेर तहसील में 4.8 मिमी बारिश हुई है। चारामा तहसील में 2.8 मिमी बारिश हुई है। पखांजुर तहसील में 1.2 मिमी बारिश हुई है।
गत वर्ष ज्यादा बारिश हुई थी
जिले भर में अभी तक की स्थिति में 67.7 मिमी प्रतिशत बारिश हुई है। 1521.7 मिमी बारिश होना है। एक जून से लेकर अभी तक की स्थिति में औसतन 1030.6 मिमी बारिश हई है। इसमें सबसे ज्यादा बारिश पखांजुर तहसील में 1474.6 मिमी बारिश हुई है। फिर अंतागढ़ तहसील में 1233 मिमी बारिश हुई है। फिर चारामा तहसील में 1052 मिमी बारिश, नरहरपुर तहसील में 1002.1 मिमी बारिश, भानुप्रतापपुर तहसील में 962.7 मिमी बारिश हुई है। कांकेर तहसील में 764 मिमी, दुर्गूकोंदल तहसील में 725.7 मिमी बारिश हुई है। गत वर्ष अभी तक की स्थिति में 1351.7 मिमी बारिश हुई थी।
फसल कटाई में हो सकती है दिक्कत
कांकेर कृषि सहायक संचालक सूरज पंसारी ने कहा बारिश से ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं है। यदि लगातार एक से दो दिन तक बारिश होती। तब धान के फसल को नुकसान होगा। दलहन, तिलहन फसल को नुकसान हो सकता है। खेतों में धान फसल का कटाई का काम को लेकर हार्वेस्टर से दिक्क्त होगी।
अरली वैरायटी की फसल को नुकसान
कांकेर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक बीरबल साहू ने कहा 10 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना है। जो इस तिथि तक कभी भी बारिश हो सकती है। बारिश से अरली वैरायटी के धान फसल को नुकसान हो सकता है। 5 से 10 प्रतिशत धान के फसल को नुकसान हो सकता है।
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