झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नियाेजन निति 2016 काे रद्द किया है। पूर्वी सिंहभूम में करीब 382 शिक्षक नियुक्त थे। इनमें कई ऐसे थे जो हाईस्कूल का शिक्षक बनने के लिए सरकारी नाैकरी छाेड़कर आए थे। उनका सपना शिक्षक बनना था और वेतन भी अच्छी थी। करीब डेढ़ साल से ये शिक्षक जिले के अलग-अलग स्कूलाें में सेवा दे रहे थे और वेतन उठा रहे थे। लेकिन अब उनकी नियुक्ति काे हाईकाेर्ट ने गलत बताते हुए रद्द कर दिया। जिसकी वजह से ये शिक्षक अब बेराेजगार हाे गए हैं। ऐसे ही कुछ शिक्षकाें की कहानी पढ़िए उनकी जुबानी...।
दिलीप कुमार भकत, उत्क्रमित उच्च विद्यालय भागाबांधी में शिक्षक
मैं इससे पहले फाॅरेस्ट इंवायरमेंट एंड क्लाईमेट चेंज विभाग में फाॅरेस्ट गार्ड था। वहां 40 हजार से अधिक वेतन मिलता था। हाईस्कूलाें में नियुक्ति निकली ताे अप्लाई किया व चयनित हुआ। गृह जिले में शिक्षक नियुक्ति हाेने पर नाैकरी छाेड़ दी।
पीयूष कुमार, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गुड़ाबांदा में शिक्षक
इससे पहले पटमदा बीडीओ कार्यालय में वीएलडब्ल्यू के पद पर था। सपना शिक्षक बनने का था। पुरानी नाैकरी छाेड़ दी क्याेंकि एक शिक्षक के रूप में सम्मान के साथ वेतन भी अधिक मिल रहा था। मेरे भराेसे पूरा परिवार है।
मानस कुमार दत्ता, शिवलाला उच्च विद्यालय मुसाबनी में शिक्षक
मैं एसबीआई में सीनियर एसाेसिएट था। 2018 में चयन हाईस्कूल शिक्षक के रूप में हाे गया। शिक्षक के रूप में 45 हजार से अधिक वेतन मिल रहा था। शिक्षक बनना मेरा सपना था और वेतन भी अधिक था। फैसले के बाद तनाव में हूं।
राजू घाेष, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बनकाटी में शिक्षक
मैं बहरागाेड़ा पाॅलिटेक्निक काॅलेज में असिस्टेंट प्राेफेसर था। वह नाैकरी अनुबंध की थी। लेकिन पैसा अच्छा मिल रहा था। सरकारी शिक्षक बनने के लिए पुरानी नाैकरी छाेड़ दी। लेकिन अब न सरकारी नाैकरी रही और न पुरानी।
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