Skip to main content

Jharkhand daily news

शहर में तीन और लोगों ने फांसी लगाई। किसी ने मानसिक बीमारी तो किसी ने आर्थिक तंगी से जान दी। सितंबर में अबतक 18 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। विश्व आत्महत्या निषेध दिवस पर गुरुवार को तनाव निवारण संस्था मुस्कान ने बिरसानगर में परिचर्चा की। बताया- 2013 से 44 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में कामयाब हुए हैं। तनाव दूर करने के लिए हेल्पलाइन 8092867918 नंबर जारी किया। ऐसे में भास्कर अपील करता है कि लोग मौत नहीं, जिंदगी को गले लगाएं।

परसुडीह- बीमारी से तंग आकर वृद्ध ने लगाई फांसी

परसुडीह थाना क्षेत्र के विद्यासागर पल्ली निवासी रणेद्रनाथ जो आदर (78) ने फांसी लगा ली। वे कुछ माह से बीमार रहने के कारण मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गए थे। गुरुवार की सुबह परिवार के लोगों ने फंदे से लटका देख पुलिस को सूचना दी। पुलिस वृद्ध को सदर अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंपा।

गोविंदपुर- आर्थिक तंगी से तंग टेंट कर्मी ने लगाई फांसी

शहर में कोरोना संक्रमण के बाद अार्थिक तंगी के कारण फांसी लगाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। गुरुवार को गोविंदपुर थाना क्षेत्र के जनता मार्केट के पास रहने वाले नरोत्तम दास (42 वर्ष) ने फांसी लगा ली। नरोत्तम टेंट हाउस में काम करता था। पिछले कई दिनों से तनाव में था। कोविड जांच कर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया।

सीतारामडेरा- रिक्शा चालक को नहीं मिला काम, आत्महत्या

सीतारामडेरा के भुइयांडीह छायानगर में रहने वाले रिक्शा चालक दिलीप कुमार रजक (32 वर्ष) ने फांसी लगाकर जान दे दी। लॉकडाउन में वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। लोगों ने बताया कि रिक्शा चालक को कई दिनों से काम नहीं मिल रहा था, इस कारण वो आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
फाइल फोटो


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/35o0yZN
via IFTTT

Comments