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Jharkhand daily news

राजधानी में कोरोना महामारी को फैलाने के मामले में तब्लीगी जमात से जुड़े 17 विदेशी सहित 18 लोगों को सीजेएम रांची फहीम किरमानी की अदालत ने सोमवार को सभी से जुर्माना लेकर मामले से मुक्त कर दिया। इससे पूर्व सीजेएम की अदालत में मामले से जुड़े सभी आरोप वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से अपने अधिवक्ता के साथ हाजिर हुए। सभी आरोपियों ने अपने-अपने वतन जाने की इच्छा को अदालत के सामने रखा। साथ ही अनुरोध किया कि सभी विदेशी आरोपी अपना-अपना अपराध कबूल कर रहे हैं। सभी 18 आरोपी कोर्ट के समक्ष लिखित आवेदन देकर अपना-अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इन पर लॉकडाउन के नियम-शर्तों का उल्लंघन करने और कोरोना संक्रमण फैलाने का आरोप का आरोप था। लिहाजा कोर्ट ने सभी आरोपियों को उनके द्वारा अपराध स्वीकार करने की स्थिति में सजा भुगतने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को जुर्माना भर देने की स्थिति में मामले से मुक्त करने का आदेश दिया।

जुर्माना... सभी को 2200-2200, रांची के मेराज को 6200 रुपए भरने पड़े

अपराध कबूल कर लेने के बाद कोर्ट ने सभी 17 विदेशी आरोपियों को 2200-2200 रुपए का जुर्माना लगाया। वहीं, हिंदपीढ़ी के रहने वाले आरोपी हाजी मेराज को 6200 रुपए का जुर्माना लगाया। मालूम हो कि अदालत के समक्ष सोमवार को इस मामले में सभी 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन की बिंदु पर सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित थी। कोर्ट ने 17 विदेशी आरोपियों पर आईपीसी की धारा 269 के तहत एक-एक हजार रुपए का जुर्माना, आईपीसी की धारा 290 के तहत 200-200 रुपए का जुर्माना और एपिडेमिक डिजीज एक्ट के सेक्शन बी के तहत एक-एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट को बताया गया कि तब्लीगी जमात के 17 विदेशियों को रांची से 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। सभी आरोपियों को 15 जुलाई को हाइकोर्ट से जमानत मिली थी। ये सभी टूरिस्ट के रूप में भारत आए थे। वे दिल्ली में एक जलसा में शामिल होने के बाद 18 मार्च को रांची पहुंचे थे।

उन्हें तीन माह के भीतर अपने-अपने देश वापस लौटना था। छह माह से कम के टूरिस्ट वीजा पर आने वालों को प्रशासन को खबर करने की जरूरत नहीं थी। इन्होंने कानून का कोई उल्लंघन नहीं किया। लॉकडाउन के कारण वे रांची में फंस गए थे और मस्जिद में रुके हुए थे। मालूम हो कि रांची पुलिस ने 30 मार्च 2020 को हिंदपीढ़ी बड़ी मस्जिद एवं मदीना मस्जिद में रह रहे तब्लीगी जमात के 17 विदेशियों को गिरफ्तार किया था। इसमें चार महिलाएं भी शामिल थी। अपराध कबूलने वाले और मामले से मुक्त होने वाले आरोपियों में लंदन का जाहिद कबीर व शिपहान हुसैन खान, यूके का महासीन अहमद व काजी दिलावर हुसैन, वेस्टइंडीज का फारूख अल्बर्ट खान, हॉलैंड का मो. सैफुल इस्लाम, त्रिनिदाद का नदीम खान, जांबिया का मूसा जालाब व फरमिंग सेसे, मलेशिया का सिति आयशा बिनती, नूर रशीदा बिनती, नूर हयाती बिनती अहमद, नूर कमरूजामा, महाजीर बीन खामीस, मो. शफीक व मो. अजीम और रांची के हाजी मेराज शामिल हैं।



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