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Jharkhand daily news

बहुमंजिली भवनाें के निर्माण में पर्यावरण स्वीकृति के लिए वन पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय द्वारा बनाए गए कानून काे नगर निगम ने आज तक नहीं माना। लेकिन एनजीटी ने जैसे ही बिना पर्यावरण स्वीकृति के चल रहे निर्माण कार्याें पर राेक लगाई, नगर निगम के अधिकारी रेस हाे गए। नगर आयुक्त मुकेश कुमार ने शहर के 22 बिल्डराें की बहुमंजिली इमारताें के निर्माण पर राेक लगा दी। बिल्डराें काे नाेटिस जारी कर पर्यावरण स्वीकृति प्लान जमा करने काे कहा। नाेटिस के बाद भी काम जारी रखने पर जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। लेकिन यहां भी अफसराें ने दाेहरी नीति अपनाई। रांची स्मार्ट सिटी और जुडकाे द्वारा बनाई जा रही बिल्डिंग काे पर्यावरण स्वीकृति नहीं होने पर भी नाेटिस नहीं दिया।

दाे लाख वर्गफीट क्षेत्रफल वाले भवन पर लगी राेक

सरकार ने 20 हजार वर्गमीटर (करीब 2 लाख वर्गफीट) से अधिक क्षेत्रफल वाले भवन के लिए पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य किया है। कितना ईंट, बालू, चिप्स, सीमेंट और लकड़ी का सामान लगेगा, स्टेट लेवल इंवायरमेंटल इंपैक्ट असेस्मेंट अथॉरिटी इसका आकलन करता है। मूल्यांकन के बाद पर्यावरण स्वीकृति दी जाती है।

असर...प्राेजेक्ट फंसेगा, ग्राहकाें काे करना हाेगा काफी इंतजार
नगर निगम ने जिन प्राेजेक्ट्स पर राेक लगाई है, उसका सीधा असर खरीदार पर पड़ेगा। पर्यावरण स्वीकृति लेने में समय लगेगा, क्याेंकि मंजूरी देने वाली एजेंसी के अध्यक्ष का पद नवंबर से खाली है। जब तक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हाे जाती, मंजूरी नहीं मिलेगी।

एनजीटी के आदेश पर बिना पर्यावरण स्वीकृति के चल रहे प्राेजेक्ट पर राेक लगाई है। जिन्हें पर्यावरण स्वीकृति मिली है, वह निगम में जमा कर काम शुरू कर सकता है। अगर सरकारी प्राेजेक्ट की भी पर्यावरण स्वीकृति नहीं है ताे संबंधित एजेंसी काे नाेटिस भेजा जाएगा।

-शंकर यादव, डीएमसी, नगर निगम



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फाइल फोटो


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