समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में शनिवार को डीसी दिलीप कुमार टोप्पो की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में सर्वप्रथम जिले में गर्भवती माताओं की फर्स्ट एएनसी (प्रसव पूर्व जांच) की स्थिति की समीक्षा की गई। इस बिंदु पर डीसी द्वारा निर्देश दिया कि धात्री माताओं का फर्स्ट एएनसी का कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे सौ फीसदी पूरा करने का लक्ष्य रखें। जिले में बीते तिमाही में फर्स्ट एएनसी की रिपोर्ट पर डीसी द्वारा निर्देश दिया गया कि धात्री माताओं तक एएनसी के लाभ की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। सहिया, सेविका, एएनएम के माध्यम से उन तक पहुंचे और एएनसी करें। साथ ही डोर-टू-डोर जाकर धात्री माताओं की सूची बनाए और उन्हें एएनसी का लाभ दें। सभी एमओवाईसी इस संबंध में पूर्व तैयारी कर लें।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि फोर्थ एएनसी में लोहरदगा जिला राज्य में सभी जिलों में दूसरे स्थान पर है। इस बिंदु पर डीसी द्वारा निर्देश दिया गया कि जो प्रखण्ड इस बिंदु पर पीछे हैं वे अपनी स्थिति को और बेहतर करें। न्यूनतम 95 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल अवश्य करें। आवश्यकता हो तो संबंधित सीडीपीओ को भी इसमें शामिल करें। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी और समाज कल्याण पदाधिकारी से भी दिशा-निर्देशन लें। डीसी ने कहा कि जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दें। जिन स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली या पानी की समस्या है तो उसकी सूची बनाकर उपलब्ध कराएं।
संबंधित कार्यपालक अभियंता से भी समन्वय स्थापित करें। इम्यूनाइजेशन में जो स्वास्थ्य केंद्र छूटे हुए हैं उन्हें विशेष अभियान चलाकर पूरा करें। बैठक में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त अखौरी शशांक सिन्हा, सिविल सर्जन डाॅ विजय कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी अखिलेश चौधरी, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि, जिला मलेरिया कार्यक्रम पदाधिकारी, एपेडेमियोलॉजिस्ट प्रशांत चौहान, सभी एमओआईसी सहित अन्य उपस्थित थे।
कुपोषित बच्चे को चिह्नित करें
डीसी द्वारा जिले में एमटीसी के स्थिति की समीक्षा की गई। जिसमें कुपोषित बच्चे को चिन्हित करने का निर्देश दिया गया। डीसी ने कहा कि कुपोषित बच्चे को चिन्हित कर उन्हें एमटीसी में भर्ती कराया जाए। आइसीडीएस, सहिया द्वारा भ्रमण कर कुपोषित बच्चे की पहचान की जाए। आदिम जनजाति के बच्चों पर ज्यादा फोकस किया जाए।
शिशु व मातृ मृत्यु दर की हुई समीक्षा
जिले में शिशु और मातृ मृत्यु दर की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि अगस्त माह में कुल 12 बच्चों की मृत्यु हुई, जिसमें लोहरदगा व किस्को में 1-1, भंडरा व सेन्हा में 3-3 और कुडू प्रखण्ड में 4 बच्चे शामिल हैं। वहीं कुल पांच माताओं की मौत प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद हुई।
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