भुइयांडीह बस टर्मिनल। समय रविवार दोपहर 1-2 बजे। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने बिहार जाने के लिए बसों का पता किया। पैसेंजर के तौर पर बस टर्मिनल पर पहुंचते ही एजेंट सक्रिय हो गए। दो से तीन की संख्या में एजेंटों ने घेर लिया। पूछने लगे कहां जाना है? पूछा-बिहार जाना है, बस कब छूटेगी? एजेंट तुरंत बोला- बसें तो नहीं चल रही हैं, लेकिन आपके जाने की दूसरी व्यवस्था टर्मिनल से हो जाएगी। बिहार जाने के नाम से एजेंट सक्रिय हो गए। एक एजेंट आया उसने बोला- इनोवा या बोलेरो यहां से खुलती है, इसमें पैसेंजर जाते हैं, आप पटना चले जाइगा।
पूछने पर उसने फोन लगाकर किसी से बात करने के बाद बोला-2 हजार रुपए लगेगा। पैसे कम करने को कहा तो बोला- दो सौ रुपए कम दे दीजिएगा। 18 सौ रुपए में पटना ले जाएंगे। एजेंट ने कहा कि आपकी सीट बुक कर दें। एक-एक कर कई एजेंट सक्रिय हो गए। आगे बढ़ा तो पता चला कि बंगाल के लिए भी बसें चल रही हैं। पुरुलिया की बात पूछी- तो वहां भी एजेंट चले आए, बोले 2.30 बजे बस खुलेगी, यह पुरुलिया जाएगी। इसके लिए 2 सौ रुपए प्रति पैसेंजर लगेंगे। टर्मिनल पर एजेंट सक्रिय है, वे पैसेंजर को पकड़ते हैं और मजबूर पैसेंजरों से दूसरे राज्य के लिए मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। कोरोना की इस आपदा को बस मालिक और निजी गाड़ी वालों ने अवसर बना लिया है। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूल रहे हैं। सरकार ने दूसरे राज्यों के लिए बसों के परिचालन पर रोक लगाई है, फिर भी बेधड़क आवागमन जारी है।
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