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Jharkhand daily news

जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर चंदाली में करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे सरकारी भवन में काम करने वाले मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही है। यही नहीं कार्यस्थल पर मजदूरों को सेफ्टी के लिए कोई उपाय नहीं है जबकि मजदूर दो मंजिलें भवन में मजदूरी कर रहे हैं। जहां कभी भी मजदूरों के साथ हादसा हो सकती है। झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन के पदाधिकारियों ने कार्य स्थल का निरीक्षण कर मजदूरों से इस संबंध में बातचीत की।
यूनियन के जिला सचिव महेंद्र जंक्शन उरांव ने मजदूरों से बातचीत के आधार पर श्रम अधीक्षक को आवेदन देकर इस पर कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने श्रम अधीक्षक को दिए आवेदन में कहा है कि कार्यस्थल पर काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि उन्हें मजदूरी मात्र 250 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। जो सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम है तथा मजदूरों को सुरक्षा के लिए ठेकेदार के द्वारा कोई उपाय नहीं किया गया है। उक्त सरकारी भवन 5 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है किंतु दूसरे तल्ले पर काम कर रहे मजदूरों की जान की सुरक्षा के लिए मौके पर कोई सेफ्टी किट नहीं है।

यूनियन के नेताओं ने श्रम अधीक्षक से मांग की है कि बिहारी मजदूरों का विभाग में पंजीयन कराई जाए उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भुगतान कराई जाए तथा उनके लिए सेफ्टी किट की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। श्रम अधीक्षक को दिए आवेदन में बूंदी देवी, नंद उराँव, पिंकी कुमारी, हीरा कुमारी, पांडेय उरांव आदि दो दर्जन से अधिक मजदूरों का नाम शामिल है।



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Workers are not getting minimum wages in government buildings being built at a cost of crores


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