एमजीएम मेडिकल कॉलेज के लैब टेक्नीशियन सुरेश प्रसाद को फर्जी कागजात के सहारे पिछले 21 वर्षों से सरकारी पद पर काम करने के आरोप में काॅलेज के प्रिंसिपल डॉ. पी बारला द्वारा एमजीएम थाने में जालसाजी करने का प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। लैब टेक्नीशियन सुरेश प्रसाद ने नालंदा मेडिकल कॉलेज का फर्जी दस्तावेज बनाकर वर्ष 1999 में नौकरी प्राप्त की थी। कैडर बंटवारे में झारखंड में पदस्थापित हो गए थे। लेकिन अवैध रूप से काम करने के मामले में प्रधान महालेखाकार ने 25 अगस्त, 2020 को कॉलेज में प्राचार्य को पत्र लिखकर नियमानुसार कार्रवाई करने के साथ ही इसकी जानकारी कार्यालय को देने की बात कही गई है।
इसके आलोक में प्रिंसिपल की ओर से यह कार्रवाई की गई है। मानवाधिकार सह सूचनाधिकार कार्यकर्ता दर्श चौधरी ने जिले के डीसी से लेकर प्रधान सचिव व प्रधान महालेखाकार तक को लेकर लिखकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की थी। मेडिकल कॉलेज में टीम गठित कर जांच की गई थी। जिसमंे यह बात सामने आई थी कि बिहार नालंदा काॅलेज से आईटीआई किया है। नालंदा कॉलेज से जानकारी हासिल की गई तो उन्होंने बताया कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति हमारे कॉलेज का नहीं है और न ही प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
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