राजधानी में पहले रजिस्ट्री दफ्तर और अब तहसील में नायब तहसीलदार के कोरोना संक्रमित होने के बाद तहसील के अफसरों ने भी दफ्तर बंद करने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया है। रजिस्ट्री में वरिष्ठ उप पंजीयक के कोरोना पॉजीटिव आने के बाद से ही वहां तीन कमरे सील है। कर्मचारियों के विरोध की वजह से शनिवार को वहां रजिस्ट्री का काम ठप रहा। पंजीयन दफ्तर के अफसरों ने भी दफ्तर को कंटेनमेंट जोन बनाने के लिए प्रस्ताव पहले ही कलेक्टर को भेज दिया है।
तहसील और रजिस्ट्री दफ्तर के अफसरों का कहना है कि दोनों ही जगहों पर हर दिन लोगों की बड़ी भीड़ लगती है। ऐसे में कोरोना फैलने का खतरा ज्यादा है। इसलिए तत्काल दोनों दफ्तरों को कम से कम सात दिनों के लिए बंद करना चाहिए। हालांकि अभी दोनों दफ्तरों के प्रस्ताव पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। कर्मचारियों के विरोध की वजह से दोनों ही सरकारी दफ्तरों में काम बंद है। इधर दूसरी ओर कलेक्टोरेट के कर्मचारियों ने भी दफ्तर बंद करने और वर्क फ्रॉम होम को लेकर विरोध तेज कर दिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद शनिवार को बड़ा स्टाफ दफ्तर नहीं पहुंचा। वहां के कर्मचारियों का कहना है कि कलेक्टोरेट में कई विभाग हैं। ऐसे में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसी परिसर में एसपी दफ्तर भी है। इस वजह से भी लोगों की भीड़ कम नहीं होती है। ऐसे में इन सभी दफ्तरों में काम करना मुश्किल है। लोगों को कोरोना नियमों की जानकारी देते हैं तो वो काम कराने को लेकर कर्मचारियों से भिड़ तक जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में घर से ही काम करना सबसे ज्यादा सुरक्षित है।
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