फरसगांव ब्लॉक मुख्यालय से करीब 8 किमी दूर बड़ेडोंगर मार्ग पर आलोर में लिंगई माता की गुफा इस साल बंद रहेगी। बताया जाता है कि कोरोना संकट के चलते प्रशासन ने इसे बंद रखे जाने का निर्णय लिया है। ऐसे में इस साल नि:संतान दंपती को इस साल लिंगई माता का आशीर्वाद नहीं मिल पाएगा।
बस्तर पुरातत्व समिति के सचिव लोकेश गायकवाड़ ने बताया कि साल 1991 से 2019 तक लगभग 70 दंपतियों को संतान प्राप्ति हुई है। इस साल कोरोना के चलते लिंगई माता का दरबार 2 सितंबर को खुलेगा, लेकिन यहां सिर्फ 5 पुजारी पूजा कर शिवलिंग के पास वार्षिक भाग्यफल के चिन्ह देख बंद कर देंगे। बताया जाता है कि रेत पर कमल के निशान से धन-संपदा वृद्धि, हाथी के पांव के निशान से धन-धान्य, घोड़ों के खुर के निशान से युद्ध और कला, बाघ के पैर के निशान से जानवरों के आतंक, बिल्ली के पैर के निशान से भय, मुर्गी के निशान को अकाल का प्रतीक माना जाता है। यही निशान बस्तर के साल का भविष्य तय करते हैं। मान्यता है भाद्रपद में एक ही दिन पूजा होती है, जबकि पूरे सालभर गुफा बंद रहती है।
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