गणपति विसर्जन के साथ ही पितर पक्ष शुरू हो गया है। लोग अपने पितरों को तर्पण करने के पानी दे रहे हैं। पितर पक्ष के बाद इस बार अधिक मास पड़ेगा। इस अधिक मास में हिंदु धर्म में कोई त्यौहार नही पड़ रहा है।
गणेश विसर्जन के बाद से ही पितर पक्ष शुरू हो गया है। 2 अगस्त को एकम था जिसमें लोगो ने सुबह अपने पूर्वजों को तोराई पत्ता में कुश का पत्ता लेकर तिल, उड़द दाल व चावल डालकर तालाब, नदी तट व घर में पितरों को पानी दिया। पितर पक्ष 17 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान रोजाना अपने पितरों को विधि विधान से पानी देने का प्रावधान है। पूर्वजों के साथ देवी देवताओं और ऋषि मुनियों का भी स्मरण किया जाता है। सामान्यत: पितर पक्ष के बाद नवरात्रि शुरू हो जाती है लेकिन इस वर्ष पितर पक्ष के बाद अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो जाएगा जो 16 अक्टूबर तक रहेगा। पितर पक्ष के बाद अधिक मास के दौरान कोई त्यौहार नही पड़ेगा। 17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होगी तथा 26 अक्टूबर को विजयादशमी पड़ रही है। राजपुरोहित प्रद्युमन शर्मा ने कहा पितर पक्ष में पूर्वजों को विधि पूर्वक पानी देने का नियम है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आर्शीर्वाद मिलता है। पानी दिए जाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितर पक्ष के बाद अधिक मास पड़ रहा है जिसमे कोई त्यौहार नही पड़ रहा है। इस दौरान शुभ कार्य करना भी वर्जित रहता है।
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