बरसात में नदी पार कर स्कूल जाना नहीं था संभव, शिक्षक ने खरीदा घोड़ा, नक्सलगढ़ में आज भी नाव से नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं शिक्षक
इंद्रावती नदी पार का धुर नक्सलगढ़ इलाके केे बड़े करका में आज भी नदी पार करके बच्चों को पढ़ाने जाना पड़ता है। शिक्षक जितेंद्र शर्मा व मेघनाथ पुजारी बताते हैं कि यह ऐसा इलाका है, जहां जाने के बाद परिवार को वापसी तक चिंता लगी रहती है। एक तरफ नदी में डूबने का खतरा तो दूसरी तरफ नक्सलगढ़ की दहशत है। यहां के 4 गांवों में 19 स्कूल हैं। जहां पहुंचने का साधन सिर्फ डोंगी है। गीदम बीईओ शेख रफीक बताते हैं कि जिस इलाके में पोस्टिंग के लिए कोई तैयार नहीं होता वहां खुद नाव चलाकर जाना बड़ी बात है।
बच्चों और ग्रामीणों का प्रेम मिला तो सब भय खत्म
नदी पार धुरनक्सल प्रभावित इलाके के बड़े करका में पदस्थ शिक्षक जितेंद्र शर्मा बताते हैं कि ड्यूटी पर निकलने के बाद जब तक सुरक्षित घर नहीं लौटते, तब तक परिवार को चिंता सताती है। लेकिन 8 साल में ग्रामीणों और बच्चों से बहुत प्रेम मिला, इतना लगाव हो गया है कि अब सबकुछ अच्छा लगता है। अभी स्कूल तो नहीं लग रहे, लेकिन मोहल्ला क्लास ले रहे हैं। शिक्षक मेघनाथ पुजारी कहते हैं शुरुआत में काफी भय रहता था, लेकिन अब आदत हो गई है।
बरसात में नदी पार कर स्कूल जाना नहीं था संभव, शिक्षक ने खरीदा घोड़ा, हर दिन 5 किमी सफर तय कर जाते हैं पढ़ाने

पंडरिया के बिरेनबाह गांव में सड़क खराब है और नदी भी है जो बरसात में भर जाती है। इसलिए शिक्षक बीरबल सिंह मरावी ने डेढ़ लाख रुपए में घोड़ा खरीदा और अब हर दिन उसी घोड़े पर 5 किलोमीटर सफर तय कर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं। ग्राम पंचायत झिंगराडोंगरी के आश्रित गांव बिरेनबाह में प्राथमिक स्कूल संचालित है। स्कूल में कुल 26 बच्चे दर्ज हैं। यहां पदस्थ शिक्षक बीरबल सिंह मरावी का निवास ग्राम मलकछरा में है, जो स्कूल से 5 किमी दूर है । मलकछरा से स्कूल तक पहुंच मार्ग खराब हो चुकी है । वहीं स्कूल से ठीक आधा किमी पहले आगर नदी पड़ती है । बरसात के दिनों में नदी को पार करना संभव नहीं हो पाता, तो शिक्षक बीरबल ने खुद के पैसे से घोड़ा खरीद लिया । ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो ।
वर्ष 2009 में हुई थी पदस्थापना, समस्या देख 18 महीने पहले खरीदा घोड़ा
शिक्षक बीरबल सिंह मरावी बताते हैं कि वर्ष 2009 में उनकी पदस्थापना बिरेनबाह स्कूल में हुई थी । तब बरसात के दिनों में आगर नदी में बाढ़ आने पर कई दिन स्कूल नहीं जा पाते थे । इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी । समस्या को देखते हुए करीब 18 महीने पहले ही उन्होंने घोड़ा खरीदा और अब उसी पर पढ़ाने जाते हैं ।
मोहल्ला क्लास भी लगा रहे
अंचल के इस गांव में नेटवर्क व अभिभावकों के पास एंड्राइड मोबाइल न होने से वर्चुअल कक्षाएं नहीं लगा पा रहे थे । ऐसे में शिक्षक बीरबल ने ग्रामीणों की मदद से मोहल्ला क्लास भी शुरु किया है । बारिश होने पर नदी बाढ़ भी आ जाए, तो वह घोड़े पर नदी पर कर बच्चों को पढ़ाने जरूर जाते हैं ।
नीलिमा राजपाल - देख नहीं सकतीं, पर पढ़ाने की ललक
भाटापारा के खोखली प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका हैं। देख नहीं सकतीं, पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पढ़ा रही हैं। बच्चों को छोटे समूहों में गाइड कर रही हैं। पोस्ट ग्रेजुएट किया और संगीत में डिप्लोमा भी। कक्षा पांचवी तक के बच्चों को पढ़ाती हैं।
शशि तिवारी - यू-ट्यूब पर नाटक अपलोड कर पढ़ाई
भाटापारा की ही शिक्षिका ने शशि तिवारी ने सिलेबस को घर-परिवार एवं पड़ोस की मदद से नाटक के रूप में रिकॉर्डिंग किया और यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया। लिंक शेयर कर बच्चों को भेजती हैं। इसे काफी सराहा गया है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2Z7tTE1
via
Comments
Post a Comment