नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में सुकमा से पदयात्रा के लिए प्रशासन ने कांग्रेसियों को अनुमति नहीं दी। ऐसे में अब पदयात्रा की तारीखों में बदलाव कर दिया गया है। सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष कवासी हरीश ने गुुरुवार को आयोजित एक पत्रवार्ता में बताया कि बस्तर के बेरोजगारों, आदिवासियों और बस्तर हित में एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।
इसके लिए सुकमा से नगरनार तक जो पदयात्रा निकालनी थी उसके लिए प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा है। कोविड-19 के कहर को देखते हुए पदयात्रा की तारीखों में बदलाव किया गया है। अब 23 सितंबर से पदयात्रा की शुरुआत सुकमा से की जाएगी।
हरीश कवासी ने कहा कि बस्तर के लोगों ने स्टील प्लांट के लिए अपनी जमीन इसलिए दी थी, क्योंकि यह एक सरकारी उपक्रम है। यदि सरकार इसे निजी हाथों में दे देती है तो फिर दोबारा कभी आदिवासी किसी भी उद्योग के लिए अपनी जमीन नहीं देगा। नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण आदिवासियों, बस्तर के बेरोजगारों के सपनों को तोड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर नगरनार का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा।
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