1 अक्टूबर यानी आज अधिक मास की पूर्णिमा है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा, दान-पुण्य व पवित्र नदी में स्नान का विधान है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने वाले को लक्ष्मीनारायण व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए। अधिकमास की पूर्णिमा को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में वृद्धि योग और सर्वार्थसिद्धि योग और गुरुवार के संयोग ने और भी प्रभावशाली बना दिया है।
पूर्णिमा के दिन चांद अपनी पूरी आकृति में होता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा करना भी काफी शुभ माना जाता है। मलमास की पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी या कुंड में स्नान और दान-पुण्य का महत्व है। पूर्णिमा पर लक्ष्मी-नारायण व्रत करने से मान्यता है कि मनुष्य की सभी सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति होती है। इस व्रत को करने से धन, संपत्ति, सुख, वैभव में वृद्धि होती है। इस व्रत को गृहस्थ ही नहीं, अविवाहितों को भी करना चाहिए, इससे उन्हें सुयोग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है। इस दिन दान करने का भी अलग महत्व है। पंडितों के बाद कथा सुनने के बाद दान करने से विशेष लाभ होता है।
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