जॉन राजेश पॉल| छत्तीसगढ़ के लिए अच्छी खबर है। राज्य को जल्द फॉरेस्ट्री कालेज खुलने वाला है। यहां ग्रेजुएशन, पीजी और डॉक्टरेट की पढ़ाई होगी। यहां पढ़कर निकलने वालों को तुरंत जॉब की गारंटी होगी। देश-विदेश में मल्टीनेशनल कंपनियों में सर्विस कर सकेंगे। साथ ही प्रदेश के 42 फीसदी हिस्से पर छाए जंगलों में शोध से नए रहस्य भी उजागर हो सकेंगे। फारेस्ट विभाग को यहां से ऐसे वनरक्षक, वनपाल, रेंजर, वन परीक्षक आदि मिल सकेंगे जो न सिर्फ जंगली जानवरों को साधने बल्कि वनोपज, वनौषधियों व जंगलों की रक्षा करने व नया रूप देने में ट्रेंड होंगे। प्रदेश में महात्मा गांधी हार्टीकल्चर यूनिवर्सिटी पाटन के पास प्रारंभ हुई है। ये कालेज उसके अधीन होगा। सात महत्वपूर्ण विषयों पर पढ़ाई, शोध व रिसर्च कराएगा। देश के दर्जनभर राज्यों में ही ऐसे कालेज हैं जो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व ओडिशा विश्वविद्यालयों के अधीन हैं। उम्मीद की जा रही है कि इंफ्रस्ट्रक्चर अच्छा डेवलप हुआ तो देश-विदेश के छात्र यहां पढ़ने आएंगे। दरअसल यह प्रोफेशनल एजुकेशन होगा इसलिए नौकरी व रोजगार के बड़े अवसर होंगे। इसकी वजह यह कि यहां वन्यप्राणी, पर्यावरण, जैव विविधता, वृक्ष सुधार, वनवर्तन, कृषि वानिकी आदि विषय स्पेशलाइजेशन के साथ पढ़ाए जाएंगे। आईसीएआर के मापदंडों के अनुसार ही इसका प्रस्ताव, कोर्स व सेटअप तैयार किया गया है। इसकी घोषणा जल्द ही सरकार करेगी। अब तक केवल इंदिरा गांधी कृषि विवि में सिर्फ एक विषय पर फॉरेस्ट्री की पढ़ाई हो रही है।
पांच सालों के लिए बजट तय
कालेज के संचालन के लिए पहले पांच सालों के लिए बजट तय कर लिया गया है। करीब पौने आठ करोड़ रुपए रिकरिंग एक्सपेंडिचर के लिए लगेंगे। नान रिकरिंग एक्सपेंडिचर में लगभग सवा दो करोड़ रुपए लगेंगे। इस तरह लगभग दस करोड़ रुपए का बजट पांच सालों के लिए होगा।
ये फायदे होंगे
- आदिवासियों को लघु वनोपज की अच्छी कीमत मिलेगी
- वनोपज के वैल्यू एडिशन, इंडस्ट्री और मार्केट का प्लेटफार्म मिलेगा
- चिरौंजी, महुआ, तेंदू-तेंदूपत्ता, हर्रा, बेहरा, गोंद आदि के प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित हो सकेंगे
- वनौषधियों के छात्र साइंटिस्ट बन सकेंगे, फार्मा इंडस्ट्री भी डाल सकेंगे
- वर्ल्ड वाइल्ड फंड, एशियन डेवलपमेंट फंड, आईसी मोड नेपाल आदि जैसी नामी संस्थाओं में अवसर
- प्राइवेट प्लांटेशन, प्लाइवुड कंपनी, पेपर मिल, बायो फ्यूल जैसे उद्योगों की भी संभावना।
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