प्रदेश में कर्मचारी संगठन अब प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरते दिखाई दे रहे है। विभिन्न मांगों को लेकर अलग-अलग संगठन काफी समय से विरोध कर रहे है। अपनी मांगों को पूरा करवाने सरकार से बार-बार अपील भी कर रहे। कुछ मांगों को पूरी भी हो रही है तो कुछ वर्गों में अब तक निराशा है। वहीं सबसे ज्यादा इस समय स्कूल की फीस को लेकर अभिभावक परेशान है। शिक्षकों की ड्यूटी कोरोना कार्यों में लगाने पर शिक्षक संगठन भी विरोध कर रहे है।
ड्यूटी लगाने से नाराज शिक्षकों ने घेरा कलेक्टोरेट
कोरोना में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से नाराज दर्जनों शिक्षकों ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट का घेराव किया। उनका आरोप था कि राज्य सरकार के आदेश के बावजूद आला अफसर उनकी ड्यूटी सर्विलांस दल में लगा रहे हैं। शिक्षकों से सर्वे के साथ ही कोरोना संक्रमितों की पहचान कराई जा रही है। ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को न तो किसी भी तरह की सुरक्षा मिल रही है न ही उनका बीमा किया गया है। ऐसे में वे भी कोरोना संक्रमित होते हैं तो उनके परिवार को बड़ी परेशानी होगी। इस मामले में छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने ड्यूटी का विरोध करने के साथ संक्रमित होकर मृत शिक्षकों के परिवारवालों को 50 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की। एसोसिएशन के लोगों ने बताया कि अधिकारियों की ओर से शिक्षकों की ड्यूटी कोरोना काल में गैर शिक्षकीय कामों में लगा दी गई है।
स्कूल संचालक दे रहे पढ़ाई बंद करने की चेतावनी
ट्यूशन फीस के मामले को लेकर राजधानी के पालक बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिलाधीश और राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में फीस को लेकर स्कूल संचालकों की मनमानी पर रोक लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। प्रदेश के स्कूल संचालकों के संगठन ने फीस नहीं जमा होने की स्थिति में 8 सितंबर से ऑनलाइन पढ़ाई बंद करने की चेतावनी दी है। कोरोना काल मे बेरोजगारी और मंदी के चलते अधिकांश पालक ट्यूशन फीस भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के नेतृत्व में पालक निगम गार्डन में एकत्र हुए। यहां एक सभा हुई, जिसमें अधिकांश पालकों ने कहा कि कोरोना काल मे वे फीस देने में सक्षम नहीं है और उधर स्कूल प्रबंधन ट्यूशन फीस के साथ ही साल के शुरू वाली फीस भी जमा करने का दबाव बना रहा है।
आंगनबाड़ी खोलने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते आंगनबाड़ी केंद्र खोलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने इसका विरोध किया है। संघ ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता पाठक ने बताया कि 2 सितंबर को स्वास्थ्य व पोषण दिवस और गर्म भोजन देने के लिए 7 सितंबर से आंगनबाड़ी खोलने का निर्देश है। जो कि अव्यवहारिक है। बढ़ते संक्रमण के दौरान यह शिशुओं और गर्भवती माताओं को संक्रमण की ओर धकेलने का काम होगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए 30 सितंबर तक स्कूल, काॅलेज और कोचिंग बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
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