बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर इलाके के भगवानपुर में कुपोषण से निपटने का प्लान भगवान भरोसे है। यहां कोडाकू जनजाति के एक कुपोषित बच्चे की मौत के बाद दैनिक भास्कर ने गांव में पहुंचकर जायजा लिया तो खुलासा हुआ कि जिस बच्चे की मौत कुपोषण के बाद बीमार होने से हुई, उसके तीन भाइयों की मौत जन्म के 24 घण्टे के भीतर ही हुई थी। इसके बाद भी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने इसकी जानकारी विभागों को दी। इतना ही नहीं महिला को किसी योजना का लाभ भी नहीं दिलाया गया। इसकी वजह से एक साल पहले कुपोषण की वजह से उसकी भी मौत हो गई। हालांकि इससे पहले कहा जा रहा था कि सांप के डसने से उसकी मौत हुई थी, लेकिन उसके पिता ने बताया कि सांप डसने के तीन माह बाद उसकी मौत हो गई थी, वह काफी कमजोर थी। वहीं पड़ोस की महिला फुलबसिया ने बताया कि जितने भी बच्चे जन्म लेते थे सभी कुपोषित होते थे, बच्चों की मां भी कुपोषित थी। इससे उसकी भी जान चली गई।
सीईओ को भेजा नोटिस पंचायत सचिव सस्पेंड
बिफन का राशन कार्ड नहीं बनने की वजह से भीख मांगकर जीविकोपार्जन की खबर दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद प्रशासन ने जनपद पंचायत सीईओ पाण्डेय को नोटिस जारी कर तीन दिनों में जवाब मांगा है। वहीं ग्राम पंचायत भगवानपुर के पंचायत सचिव यशवंत सिंह को जिपं सीईओ हरीश एस ने सस्पेंड कर दिया। कलेक्टर ने एकीकृत बाल विकास परियोजना वाड्रफनगर के परियोजना अधिकारी महेश मरकाम तथा सेक्टर पर्यवेक्षक बरतीकला सुशीला मरकाम को भी नोटिस दिया है।
5-7 गम्भीर कुपोषित बच्चे पहुंचते हैं
बच्चे का इलाज करने वाले डॉ. संजय पालेश्वर ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में हर माह पांच-सात गम्भीर कुपोषित बच्चे आते हैं। कर्मियों ने कहा कि बच्चों के माता-पिता बताते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र में दूध अंडा नहीं मिलता, न ही उन्हें इसकी जानकारी है।
नया कार्ड बनने के बाद से ही नहीं मिल रहा था राशन
दैनिक भास्कर को मृत बच्चे के नाना बिफन ने बताया कि सोमवार को उसके घर के बाहर अधिकारियों का जमावड़ा था। उसे सोमवार को ही सरपंच ने राशन लाकर दिया। उसके घर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कभी नहीं आए। यह भी बताया कि उसे तब से राशन मिलना बंद हुआ है जब से नए राशन कार्ड से सभी को मिलना शुरू हुआ, लेकिन उसे नहीं मिला। ऐसे में वह भीख मांगकर दो बच्चों को पालता था। उसका दूसरा नाती भी कुपोषित है, उसे अधिकारियों ने रामानुजगंज एनआरसी में भर्ती कराया है।
सरकारी आंकड़े खुश करते हैं, लेकिन हकीकत अलग
बलरामपुर जिले में अक्टूबर 2019 में कुपोषित 22 हजार बच्चों का नाम दर्ज था। अब 10 महीने बाद विभाग का दावा है कि महज 12 हजार बच्चे ही कुपोषित बचे हैं। इस तरह आकड़ों पर गौर करें तो हर माह जिले में एक हजार बच्चे कुपोषण से मुक्त हुए, लेकिन भगवानपुर में कोडाकू जनजाति में पिछले छह सालों से एक कुपोषित महिला को पोषित नहीं कर पाने के कारण जहां एक साल पहले बीमार होकर उसकी जान चली गई तो उसके चार बच्चे भी कुपोषण के काल के गाल में समा गए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
डॉक्टर ने कहा- गम्भीर रूप से कुपोषित था बच्चा, वर्ना बच जाती जान
डॉ. संजय पालेश्वर ने बताया कि बच्चे का वजन 4.5 किलो था। हीमोग्लोबिन 5.5 ग्राम था। इससे उसकी प्रतिरोधक क्षमता खत्म थी और सुबह उसे यहां से एनआरसी भेजा जाता उससे पहले उसकी मौत हो गई। हालांकि उनके पास भी इसका कोई ठोस जवाब नहीं है कि बच्चे को भर्ती कर स्वस्थ्य केन्द्र में ही रात में इलाज क्यों नहीं किया गया। अगर अस्पताल में भर्ती कर डॉक्टर अपनी निगरानी में इलाज करते तो शायद उसकी जान बच सकती थी। बता दें कि अफसर बच्चे की मौत बीमारी से होना बताकर कुपोषण को छिपा रहे हैं।
कार्यकर्ता तीन बार गई थी, घर में कोई नहीं मिला, फिर भी लापरवाही है
जिला महिला बाल विकास अधिकारी जेआर प्रधान ने बताया कि जिस बच्चे की मौत हुई है। उसके घर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नाम दर्ज करने तीन बार गई थी लेकिन वे नहीं मिले, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लापरवाही है, उन्हें बार बार जाना चाहिए था और लाभ दिलाकर बच्चे को कुपोषण से मुक्त करना था। इस पर परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस दिया है। सभी पर सख्त कार्यवाही होगी।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3jALU5h
via
Comments
Post a Comment