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वायरलेस सिस्टम के लाइसेंस पर करोड़ों खर्च लेकिन ई-मेल व वाट्सएप पर भेज रहे सूचनाएं

छत्तीसगढ़ पुलिस हर साल वायरलेस सेट की रेडियो फ्रीक्वेंसी पर करोड़ों लाइसेंस फीस देती है, लेकिन सूचनाएं ई-मेल और वाट्सएप के जरिए भेजी जा रही हैं। ऐसे में वायरलेस सेट के महत्व पर ही सवाल उठने लगे हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अब आरक्षक से लेकर डीजीपी के पास अपने सीयूजी नंबर हैं।
कुछ साल पहले तक पुलिस के वायरलेस सेट पर जारी होने वाले संदेश रेडियो और टीवी पर भी सुनाई देते थे। इसका सबसे बड़ा नुकसान नक्सल मोर्चे पर हुआ था। नक्सलियों ने पुलिस की फ्रीक्वेंसी का पता चला लिया था और उससे सूचनाएं लेते थे। बाद में इसे बदलकर डिजिटल सेट दिया गया है। इसकी सूचनाएं नक्सलियों तक नहीं पहुंच सकती। जंगल के भीतर जहां मोबाइल काम नहीं करते, वहां वायरलेस सेट पर ही कंट्रोल रूम से ऑपरेशन पर निकले जवान जुड़े रहते हैं। इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों में आज भी आधी रात के बाद सभी थानों को वितंतु संदेश जारी किए जाते हैं, जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर ड्यूटी की सूचना होती है, जबकि ये सभी पहले ही वाट्सएप या ई-मेल के जरिए पहुंच चुकी होती है। रायपुर में ही सौ से ज्यादा वेरी हाई फ्रीक्वेंसी के सेट बांटे गए हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

दस करोड़ में बांटे वॉकी-टॉकी हैंडसेट
कुछ साल पहले पुलिस को दस करोड़ खर्च कर 18 हजार से ज्यादा वॉकी-टॉकी हैंडसेट बांटे गए थे। इसे लेकर भी अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर पुलिसकर्मियों के पास वायरलेस सेट पर जो सूचनाएं आती हैं, उसकी आवाज इतनी ऊंची होती है कि आसानी से आसपास के लोग सुन सकते हैं। ऐसे में गोपनीयता नहीं रहती। पुलिस महकमा भी अब इंटरनेट या अन्य माध्यमों से सूचनाएं भेजने का आदी हो गया है, इसलिए वॉकी-टॉकी के जरिए कोई नोट करने में रुचि नहीं लेता। सरकारी कामकाज के मुताबिक ही वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल किया जाता है।

सूचनाएं लीक होने का डर दोनों में
पुलिस अफसरों का मानना है कि रेडियो लाइसेंस के लिए पुलिस महकमा सालाना करीब 15 करोड़ रुपए खर्च करता है। उस पर ई-मेल या वॉकी-टॉकी दोनों में ही सूचनाएं लीक होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि साइबर अपराधी दोनों ही सिस्टम को हैक कर सकते हैं या मेनुअल इस्तेमाल के दौरान भी जो सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं, उसे आसपास के लोग सुन सकते हैं। ऐसी स्थिति में इंट्रानेट भी एक अच्छा माध्यम हो सकता है। हालांकि इंट्रानेट के जरिए सभी पुलिस थाने और मुख्यालय को जोड़ने में काफी खर्च आएगा। इस संबंध में फिलहाल महकमे की ओर से कोई बात प्रक्रिया नहीं की जा रही है।



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Crores spent on wireless system license but sending information on e-mail and WhatsApp


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