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खेतों में खिले कांस के फूल मानसून की विदाई का संकेत

सरगुजा जिले के मैनपाट इलाके में खेतों में कांस के फूल खिलना शुरू हो गए हैं। ऐसा माना जाता है कि कांस के फूल का आना, बर्षा रितु की विदाई का संदेश है। श्रीराम चरित मानस में उल्लेख है कि बरषा विगत शरद रितु आई, लक्ष्मन देखहु परम सुहाई, फूलें कांस सकल महि छाई, जनु वरषा कृत प्रगट बुढ़ाई। अर्थात भगवान श्रीराम कहते हैं, हे लक्ष्मण देखो वर्षा बीत गई और परम सुंदर शरद रितु आ गई। फूल हुए कांस से सारी पृथ्वी छा गई, मानो वर्षा रितु ने (कांस रूपी सफेद बालों के रूप में) अपना बुढ़ापा प्रकट किया है।

गन्ने की प्रजाति है कांस वनस्पति
कांस एक प्रकार से गन्ना (ईंख) की वेरायटी है। अंग्रेजी में इसे वाइल्ड शुगरकेन कहा जाता है। इसके पत्ते गन्ने जैसे ही दिखते हैं। पुराने जमाने में लोग कांस के फूलों को एकत्र करके गद्दे आदि बनाते थे। यह फूल ऐसा है, जिसे जानवर भी खाना पसंद नहीं करते।

मौसम विभाग की उम्मीद है कायम
सरगुजा जिले में सामान्य से करीब 27 फीसदी कम बारिश हुई है। अभी तक 828 मिमी ही हुई है। मानसून द्रोणिका हिमालय की तरफ खिसक गया है जिससे मानसून ब्रेक का कंडिशन है। मानसून द्रोणिका सामान्य स्थिति की ओर लौटेगा तब फिर एक बार फिर अच्छी बारिश की संभावना है।



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Cannes flowers blooming in fields indicate farewell to monsoon


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