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पोटाकेबिन में पढ़ने वाले बच्चों के गांव जाकर पढ़ा रहे

बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने दंतेवाड़ा में तरह-तरह के प्रयोग हो रहे हैं। अब कासोली पोटाकेबिन के शिक्षकों ने एक अच्छी शुरुआत की है। यहां जिस गांव कासोली में पोटाकेबिन है व शिक्षकों की पोस्टिंग है, सिर्फ वहीं नहीं बल्कि उन गांवों में भी जाकर क्लास ले रहे हैं जिन गांवों में इस पोटाकेबिन में पढ़ने वाले बच्चे रहते हैं।
गायें चराते बच्चों को भी पढ़ाई के लिए बैठा रहे व पत्ता का मास्क बनाकर शिक्षक पहना रहे हैं। प्राचार्य के नाग ने बताया कड़तीपारा, जावंगा, बड़े कारली, छोटे कारली सहित अन्य गांव में शिक्षक मोहल्ला क्लास ले रहे हैं।

अंदरूनी गांवों में शुरू नहीं हो पाई मोहल्ला क्लास
इधर दंतेवाड़ा जिले के कई गांवों में मोहल्ला क्लास शुरू ही नहीं हो पाई है। इनमें कुआकोंडा, कटेकल्याण क्षेत्र के अंदरूनी गांवों की संख्या ज्यादा है। कहीं हफ्ते में एक बार शिक्षक जाकर क्लास ले रहे हैं तो कई इलाके अब भी शिक्षकों की पहुंच से दूर हैं। शिक्षक बताते हैं कि कई जगह कोरोना के भय से ग्रामीण अपने बच्चों को मोहल्ला क्लास भी भेजने से कतराते हैं।

20-25 किमी के दायरे के गांवों में जा रहे पढ़ाने
कासोली पोटाकेबिन में 332 बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। शिक्षकों ने तय किया कि कासोली व इसके 20-25 किमी के दायरे में आने वाले उन गांवों में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे जहां इस पोटाकेबिन के बच्चे रहते हैं। शिक्षक राधेश्याम देवांगन, लक्ष्मी नेताम, सरोज बाला टंडन, संतोष मानिकपुरी, रंजीता मंडावी, नितिन झा, चन्द्रनाथ यादव, मालती ने मिलकर अलग- अलग टीम बनाई और ये हर दिन अलग- अलग गांवों में जाकर मोहल्ला क्लास ले रहे।



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Going to the village of children studying in Potacabin


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