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शुगर मिल में चल रही थी बैठक तभी खदान में हुई ब्लास्टिंग

शुक्रवार की शाम केरता इलाके में कोयला खदानों में ब्लास्टिंग से मिल में आ रही दरारों को लेकर मंथन चल रहा था तभी शाम साढ़े पांच बजे फिर ब्लास्टिंग हुई।
शुगर मिल के जीएम विजय सिंह उइके ने दैनिक भास्कर को फोन कर बताया कि खदान में ब्लास्टिंग के बाद मिल परिसर में कंपन इतनी तेज था कि मशीनें और बिल्डिंग हिलने लगी थी। हम लोग दफ्तर में बैठक कर रहे थे और ऐसा लगा कि भूकंप आ गया। इस तरह की स्थिति जब-जब ब्लास्टिंग होती तब-तब रहती है। खदान में ब्लास्टिंग के लिए समय निर्धारित है और इसके बोर्ड भी लगे हुए हैं लेकिन पालन नहीं किया जाता। प्रबंधन का कहना है कि हैवी ब्लास्टिंग से इस तरह की समस्या खड़ी हो रही है। एसईसीएल के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर कोयला उत्खनन के लिए हैवी ब्लास्टिंग पर रोक लगाने को कहा है। मिल प्रबंधन के अनुसार महान 3 खुली खदान में हैवी ब्लास्टिंग हो रही है। इससे शुगर मिल में गंभीर हादसा हो सकता है। मिल में मजदूरों से शक्कर लोडिंग का कार्य कराया जा रहा है। हैवी ब्लास्टिंग की बजाय कंट्रोल ब्लास्टिंग करने व ब्लास्टिंग के लिए समय निर्धारित करने को कहा गया है ताकि उस दौरान लोडिंग कार्य बंद कर दुर्घटना से बचा जा सके। इससे पहले भी कई बार इस मुद्दे पर पत्र लिखा गया था लेकिन समस्या जस की तस है। सूरजपुर कलेक्टर रणवीर शर्मा ने शुगर मिल प्रबंधन की शिकायत पर कॉलरी के जीएम को बिना सूचना के ब्लास्टिंग नहीं करने के निर्देश दिए हैं। वहीं टाइमिंग निर्धारित करने को कहा है ताकि लोग सतर्क रहें लेकिन इसका भी पालन नहीं किया जा रहा।

बोरी गिरने से मजदूर की हो गई थी मौत
दो महीने पहले शुगर मिल में शक्कर लोडिंग के दौरान एक मजदूर की शक्कर की बोरी गिरने से मौत हो गई थी। ब्लास्टिंग से मिल में तेज कंपन होता है और शक्कर की बोरियां गिरने लगती हैं। मिल प्रबंधन हैवी ब्लास्टिंग पर रोक लगाने पत्र लिख रहा है।

कभी भी हो जाती है हैवी ब्लास्टिंग
कोयला खदान के बाहर ब्लास्टिंग के लिए सूचना बोर्ड लगे हुए हैं उसमें ब्लास्टिंग का समय दोपहर दो बजे से साढ़े चार बजे तक का है। मिल प्रबंधन का कहना है कि शाम पांच बजे के बाद भी ब्लास्टिंग हो रही है।



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