तारबाहर का डीपूपारा तालाब शहर का पाचवां तालाब होगा, जिसके सुधार के नाम पर नगर निगम ने बड़ी रकम खर्च की। स्मृति वन, बंधवापारा तालाब, जतिया तालाब, जोरा तालाब के उन्नयन के नाम पर नगर निगम ने 8 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर दी। साल 2008 में करीब एक करोड़ रुपए खर्च कर डीपूपारा तालाब का सौंदर्यीकरण कराया गया। तालाब के बीच में जाने के लिए कांक्रीट का पुल बनाया गया, जहां पहुंच कर लोग तालाब की जलराशि और रंगबिरंगी रोशनी का आनंद उठा सकते थे। तालाब के चारों ओर सैर के लिए पहुंचने वालों के लिए पाथ वे, कारपेट घास, फूलों के पौधे, बच्चों के खेलकूद के उपकरण लगाए गए, परंतु इनकी देखरेख की ओर ध्यान नहीं दिया गया। मेंटेनेंस के अभाव में अब तालाब में लोग कपड़े धोते हैं। कचरा, मलबा फेंकने के कारण किनारे का पानी गंदा हो चुका है और उससे सड़ांध उठती है। जोरा तालाब को छोड़कर सभी तालाबों की हालत बदतर है। बंधवापारा और जतिया तालाब में तो पानी ही नहीं है।
उद्यान, जोन जिम्मेदारी लेने तैयार नहीं
डीपूपारा तालाब व्यापार विहार जोन के अंतर्गत आता है। जोन कमिश्नर आरएस चौहान से तालाब की दुर्दशा, मेंटेनेंस के अभाव के विषय में पूछने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि फंड नहीं होने से वर्तमान में सुधार के कोई कार्य नहीं कराे जा सकते हैं। उद्यान विभाग के प्रभारी सुब्रत कर का कहना है कि डीपूपारा तालाब के उद्यान का देखरेख उनके अंतर्गत नहीं है। वह शहर के उद्यानों के प्रभारी हैं, जिन्हें कोरोनाकाल में बंद कर दिया गया है। डीपूपारा तालाब के जोन के अंतर्गत आता है। जाहिर है कि निगम जिस तालाब पर एक करोड़ रुपए खर्च कर चुका है, उसकी देखरेख भी जरूरी नहीं समझता। तालाब के चारों ओर लगाई गई लाइटें, कुर्सियां, सजावट के सामान, टाइल्स आदि लगातार चोरी हो रहे हैं।
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