बस्तर संभाग के पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत तक के पदाधिकारियों को मानदेय देने और वित्तीय अधिकार देने के साथ अनुमोदन का अधिकार देने की मांग को लेकर सीएम भूपेश बघेल के नाम कलेक्टर रजत बंसल को ज्ञापन सौंपा है। अपने ज्ञापन में उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने की मांग भी की है।
अपने ज्ञापन में उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में जिला पंचायत के पदाधिकारी प्रत्यक्ष निर्वाचन से चुनकर आते हैं। इसके बाद सदस्यों के चुनाव के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जाते हैं। ऐसे में उनके पद की गरिमा को देखते हुए उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिलना चाहिए। इसके साथ ही जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अध्यक्ष को वित्तीय अधिकार के साथ ही अनुमोदन करने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए, जिससे जनहित में वे तत्काल कोई फैसला ले सकें। इस दौरान सुकमा जिपं अध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में लोहंडीगुड़ा जपं अध्यक्ष महेश कश्यप, जगदलपुर जपं अध्यक्ष अनीता पोयाम, जिपं उपाध्यक्ष बस्तर मनीराम कश्यप, बस्तर के जपं उपाध्यक्ष मोहन मौर्य, कोंडागांव के जपं उपाध्यक्ष मनोज कुमार सेठिया, फरसगांव जपं अध्यक्ष शीश कुमारी, शिवलाल मंडावी, पंदी वड्डे सहित अन्य मौजूद थे।
ये मांगे भी शामिल
इसके अलावा जिपं अध्यक्ष की निधि में 1 करोड़, जपं अध्यक्ष निधि में 50 लाख, जिपं सदस्य निधि में 20 लाख, जपं सदस्य निधि में 10 लाख और ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच को 5 लाख रूपए बतौर पंच निधि दी जानी चाहिए। जिला पंचायत उपाध्यक्ष को जिला मुख्यालय में आवास और सुरक्षा देनेे के साथ ही जिपं अध्यक्ष को 50 हजार, उपाध्यक्ष को 40 हजार, सदस्य को 20 हजार, जपं अध्यक्ष को 25 हजार, उपाध्यक्ष को 20 हजार और सदस्य को 10 हजार रूपए का मानदेय दिया जाना चाहिए।
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