कोरोना से लगातार मौतें तथा रिपोर्ट के इंतजार में रोके गए शवों के कारण अंबेडकर अस्पताल की मर्चुरी फुल हो गई है। शुक्रवार को वहां 32 शव रखे थे, इसलिए डाक्टरों को कंपोज रूम में पोस्टमार्टम करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की एसीएस रेणु पिल्ले ने भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद निर्देश दिए हैं कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो और उसमें कोरोना के लक्षण होने की वजह से सैंपल जांच के लिए भेजा गया हो, तो रिपोर्ट आने तक इंतजार करने के बजाय कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करवा दिया जाए। उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि कोरोना के लक्षण वाले किसी व्यक्ति की मृत्यु हो तो शव से आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल ले लिया जाए। इसके बाद अंतिम संस्कार करवा दिया जाए। विभिन्न जिलों से रायपुर अथवा जिलों में स्थिति रीजनल डेडिकेटेड कोरोना अस्पतालों में हुई मौत की सूचना नोडल अधिकारी को समय पर मिल जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें ही शव का परिवहन और अंत्येष्टि की व्यवस्था करनी है। गौरतलब है कि प्रदेश में रोजाना औसतन 10 मरीजों की कोरोना से मौत हो रही है। इसकी तुलना में अंतिम संस्कार कम हो रहे हैं, इसलिए शव रुक रहे हैं और मर्चुरी पैक हो रही है। इस बीच, अंबेडकर अस्पताल ने मर्चुरी में संक्रमण को रोकने के लिए शव बाहर निकालकर भीतर सफाई और सेनिटाइजेशन करवाया था। डॉक्टराें का कहना है कि परिजन अंतिम संस्कार के लिए रोज पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें प्रोटोकॉल की वजह से न शव दे पा रहे हैं और न ही अंतिम संस्कार हो रहा है।
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